आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 'द्वीप पर्यटन' को बढ़ावा देने का आह्वान किया
अमरावती, 6 जनवरी (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को मालदीव की तर्ज पर राज्य में द्वीप पर्यटन को विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पर्यटन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और समुद्र तट पर्यटन के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।
प्रथम राज्य निवेश बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्यलंका समुद्र तट को 15 किलोमीटर के क्षेत्र में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सूर्यलंका समुद्र तट को प्रदूषण मुक्त क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। सूर्यलंका के साथ-साथ सुल्लुरपेटा के पास स्थित छोटे द्वीपों को भी समुद्र तट पर्यटन के तहत विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हमें मालदीव की तर्ज पर द्वीप पर्यटन विकसित करना चाहिए। अगर हम 25,000 कमरे बना सकते हैं, तो हम पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं।
नायडू चाहते थे कि अधिकारी पापीकोंडालू-पोलावरम क्षेत्र को पर्यटन के लिए विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करें। कोनासीमा, पुलिकट और विशाखापत्तनम क्षेत्र उत्कृष्ट पर्यटन केंद्र बन सकते हैं। अनंतपुर से गांडीकोटा तक भी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में पर्यटन निगम की आय 1,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने के लिए योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।
मंगलवार को आंध्र प्रदेश राज्य निवेश बोर्ड की बैठक में 19,391 करोड़ रुपए के निवेश वाली 14 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
बैठक में उद्योग, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा क्षेत्रों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनसे 11,753 युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने 2025 के दौरान भारी निवेश आकर्षित करने में अधिकारियों के टीम वर्क की सराहना की और उन्हें 2026 में भी इसी टीम भावना के साथ काम करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के शासनकाल में राज्य की छवि जो धूमिल हो गई थी, उसे बहाल कर दिया गया है और बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है।
उन्होंने बताया कि गूगल, टाटा, जिंदल, बिरला, अदानी, रिलायंस, टीसीएस और कॉग्निजेंट जैसी प्रमुख कंपनियां आंध्र प्रदेश में निवेश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि जरा सी भी गलती की गुंजाइश न रहे।
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