Samachar Nama
×

अंबुमणि रामदास ने पल्लीकरनई वेटलैंड के सुरक्षा क्षेत्र में कटौती पर उठाए सवाल, अथॉरिटी को घेरा

अंबुमणि रामदास ने पल्लीकरनई वेटलैंड के सुरक्षा क्षेत्र में कटौती पर उठाए सवाल, अथॉरिटी को घेरा
अंबुमणि रामदास ने पल्लीकरनई वेटलैंड के सुरक्षा क्षेत्र में कटौती पर उठाए सवाल, अथॉरिटी को घेरा

चेन्नई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु राज्य वेटलैंड अथॉरिटी पर आरोप लगाया है कि वह पल्लीकरनई दलदली इलाके (मार्श) की सुरक्षा के बजाय प्राइवेट डेवलपर्स के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अथॉरिटी के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें वेटलैंड के 'प्रभाव वाले क्षेत्र' (जोन ऑफ इन्फ्लुएंस) को काफी कम कर दिया गया है, जबकि इसकी सीमाओं की नोटिफिकेशन में देरी की जा रही है।

एक बयान में उन्होंने कहा कि अथॉरिटी ने मद्रास हाई कोर्ट को बताया था कि इस साल 30 सितंबर को अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद जोन का आकार 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़ कर दिया जाएगा।

यह जानकारी उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दी गई जो प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पिछले साल 24 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थीं, जिसमें दलदली इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

उन्होंने कहा कि डेवलपर्स ने अथॉरिटी के फैसले का स्वागत किया। अंबुमणि ने सवाल उठाया कि अथॉरिटी ने जोन का आकार घटाने के लिए तो तेजी से काम किया, लेकिन वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की सीमा तय करने और उन्हें नोटिफाई करने के सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर, 2024 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही।

उन्होंने पूछा, "क्या अथॉरिटी सरकार और लोगों के लिए काम कर रही है, या प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए?"

उन्होंने कहा कि पीएमके वैज्ञानिक तरीके से प्रभावित क्षेत्रों (जोन ऑफ इन्फ्लुएंस) को तय करने और वेटलैंड की सीमाओं का पूरा सर्वे करके उन्हें नोटिफाई करने के पक्ष में है।

उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उसे रेगुलेट किया जाना चाहिए।

2021 के इसरो वेटलैंड एटलस का जिक्र करते हुए अंबुमणि ने कहा कि सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल करके तमिलनाडु के 2.25 हेक्टेयर से बड़े 26,883 वेटलैंड्स की पहचान और सीमा तय की जा सकती है।

उन्होंने याद दिलाया कि अथॉरिटी ने पिछले साल 3 दिसंबर को हाई कोर्ट को बताया था कि पल्लीकरनई की सैटेलाइट-आधारित मैपिंग 99 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जमा करने के लिए और समय मांगा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद दस महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी नोटिफिकेशन पेंडिंग है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2016 में अथॉरिटी के गठन और 2017 में वेटलैंड संरक्षण नियम लागू होने के बावजूद कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बहुत कम प्रगति हुई है।

अंबुमणि ने टीवीके सरकार से आग्रह किया कि वह पिछली डीएमके सरकार के समय से चली आ रही देरी को खत्म करे और यह सुनिश्चित करे कि अथॉरिटी अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे।

उन्होंने दावा किया कि पल्लीकरनई, जो कभी अडयार नदी और बकिंघम नहर के बीच 15,000 एकड़ में फैला था और गुइंडी से सिरुसेरी तक जाता था, अब कब्जों के कारण सिमटकर 1,725 ​​एकड़ रह गया है। उन्होंने सभी वेटलैंड्स के लिए तुरंत नोटिफिकेशन और सुरक्षा की मांग की।

साथ ही, उन्होंने पल्लिकरनाई में तीन किलोमीटर लंबी छह-फीट ऊंची सुरक्षा दीवार और दो किलोमीटर लंबे वॉकवे के निर्माण को रोकने की भी मांग की। उन्होंने सरकार से दखल देने की अपील करते हुए कहा कि इन प्रोजेक्ट्स के तहत जो निर्माण पहले ही हो चुके हैं, उन्हें गिरा दिया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

Share this story