भारतीय मूल के अमी बेरा ने आठवीं बार जीता अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव
वाशिंगटन, 4 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय प्रवासी परिवार से आने वाले अमी बेरा ने यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव लगातार आठवीं बार जीत लिया है। वह फिलहाल कांग्रेस में सबसे लंबे समय से सेवा दे रहे भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं। बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल जिले में रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर जीत दर्ज की।
बेरा 2013 से सैक्रामेंटो काउंटी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कैलिफोर्निया में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद उन्होंने इस बार तीसरे जिले से चुनाव लड़ा। वह प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति (फॉरेन अफेयर्स कमेटी) की पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र उपसमिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य हैं। इसके अलावा वह हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के भी सदस्य हैं।
सितंबर 2025 में अमी बेरा ने पांच सदस्यीय अमेरिकी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए भारत का दौरा किया था। उस समय ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने की घोषणा की थी। इस फैसले की आलोचना करते हुए बेरा ने कहा था, "यह ठीक से सोची-समझी नीति नहीं थी। 1,000 से 4,000 डॉलर के बीच की फीस ज्यादा उचित होती।" उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी टेक कंपनियों को नुकसान होगा और संभव है कि कंपनियां अमेरिका में नौकरियां बढ़ाने के बजाय हैदराबाद या बेंगलुरु में अपना विस्तार करें।
जब ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, तब बेरा ने सीधे संवाद का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "अगर राष्ट्रपति ट्रंप मुझसे सलाह मांगें, तो मैं कहूंगा कि प्रधानमंत्री मोदी को फोन करिए।" बेरा का मानना था कि भारत को रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त कराने में एक सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा, "मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह मानता है कि किसी अच्छे मित्र देश पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना सही रास्ता है।"
'द प्रिंट' से बातचीत में उन्होंने इन शुल्कों के पीछे की सोच पर भी सवाल उठाया और कहा कि यदि यह नीति सही है तो फिर चीन पर इसी तरह का शुल्क क्यों नहीं लगाया गया। दिसंबर 2025 में एक संसदीय सुनवाई के दौरान भी उन्होंने कहा था कि एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने से अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। भारत और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर बेरा का रुख भी काफी स्पष्ट रहा है।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव पर उन्होंने कहा था, "आखिरकार भारत और पाकिस्तान, दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और दोनों को तनाव कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।"
उन्होंने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की अपील भी की थी। अमी बेरा जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान भी मौजूद थे। साल 2015 में वह 'कांग्रेसनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन्स' के सह-अध्यक्ष बने थे। इस पद पर पहुंचने वाले वह पहले भारतीय-अमेरिकी थे। वह उन सांसदों में भी शामिल हैं जो कैपिटल हिल में दिवाली समारोहों में भाग लेते हैं। तीन भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों में अमी बेरा को सबसे मध्यमार्गी (सेंट्रिस्ट) नेता माना जाता है।
अमी बेरा न्यू डेमोक्रेट कोएलिशन के सदस्य हैं। उनकी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और लागत कम करना, सैक्रामेंटो क्षेत्र का विकास तथा राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल हैं। उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह 'आजीवन कैलिफोर्निया निवासी और भारतीय प्रवासी परिवार के बेटे' हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, इरविन से स्नातक और मेडिकल डिग्री हासिल की। उन्होंने अपनी मेडिकल पढ़ाई का खर्च खुद उठाया और 10,000 डॉलर से कम के कर्ज के साथ पढ़ाई पूरी की।
उनकी वेबसाइट के अनुसार, डॉक्टर के रूप में उन्होंने करीब 20 साल तक काम किया। वे कैलिफोर्निया पैसिफिक मेडिकल सेंटर में चीफ रेजिडेंट रहे और मेडक्लिनिक मेडिकल ग्रुप में नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी संभालीं। उनके माता-पिता गुजरात के राजकोट से अमेरिका जाकर बसे थे।
चुनावी फंडिंग रिकॉर्ड के मुताबिक, 2026 के चुनावी चक्र में उनके अभियान ने लगभग 1.5 मिलियन डॉलर और 14 अक्टूबर तक उनके पास करीब 1.7 मिलियन डॉलर नकद राशि उपलब्ध थी।
--आईएएनएस
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