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महाराष्ट्र: अजीत पवार ने सिंचाई परियोजना को लेकर किया खुलासा, भाजपा ने 25 साल की चुप्पी पर उठाए सवाल

पुणे, 14 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन की पिछली सरकार पर 'पार्टी फंड' इकट्ठा करने के लिए एक सिंचाई परियोजना की लागत को 110 करोड़ रुपए तक बढ़ाने का आरोप लगाया है।
महाराष्ट्र: अजीत पवार ने सिंचाई परियोजना को लेकर किया खुलासा, भाजपा ने 25 साल की चुप्पी पर उठाए सवाल

पुणे, 14 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन की पिछली सरकार पर 'पार्टी फंड' इकट्ठा करने के लिए एक सिंचाई परियोजना की लागत को 110 करोड़ रुपए तक बढ़ाने का आरोप लगाया है।

इस आरोप से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब एनसीपी पुणे और पिंपरी-चिंचवड में नगर निगम चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रही है, जिससे राज्य स्तर पर उसके सहयोगी भाजपा के साथ सीधा टकराव हो रहा है।

अजीत पवार ने पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि 1999 में एनसीपी के सत्ता में आने से पहले तत्कालीन सरकार ने परियोजनाओं की लागत में काफी वृद्धि की थी।

उन्होंने पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना के बारे में बात करते हुए कहा, "महाराष्ट्र कृष्णा घाटी विकास निगम (एमकेवीडीसी) मेरे अधिकार क्षेत्र में था। मेरे पास अभी भी इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं।"

उन्‍होंने कहा, "पुरंदर योजना का मूल अनुमान एक निश्चित राशि का था, लेकिन जब मैंने कार्यभार संभाला, तो पाया कि लागत बढ़कर 330 करोड़ रुपए हो गई थी। जब मैंने अधिकारियों से पूछा कि लागत में 110 करोड़ रुपए की वृद्धि कैसे हुई, तो उन्होंने मुझे बताया कि 100 करोड़ रुपए इसलिए जोड़े गए क्योंकि 'पार्टी फंड' की आवश्यकता थी, और अधिकारियों ने इसके ऊपर 10 करोड़ रुपए और जोड़ दिए।"

उपमुख्यमंत्री पवार ने आगे कहा कि उन्होंने उस समय उस अतिरंजित योजना को रद्द कर दिया था।

उन्होंने कहा, "मेरे पास हस्ताक्षरित दस्तावेज सबूत के तौर पर मौजूद हैं। अगर मैंने ये फाइलें पहले जारी कर दी होतीं तो भारी हंगामा मच जाता क्योंकि हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।"

मौजूदा समय में इस तरह के खुलासे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि एनसीपी वर्तमान में पुणे क्षेत्र में एनसीपी (एसपी) और भाजपा दोनों के खिलाफ वर्चस्व के लिए एक कड़े संघर्ष में है।

पवार ने इससे पहले सप्ताह में भाजपा को निशाना बनाते हुए जनता को याद दिलाया था कि जिन लोगों ने कभी उन पर "70,000 करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले" का आरोप लगाया था, वे अब उनके साथ सत्ता में बैठे हैं।

डिप्‍टी सीएम पवार के इस नवीनतम बयान को उनके मौजूदा मंत्रिमंडल सहयोगियों पर सीधा हमला माना जा रहा है, क्योंकि 1990 के दशक में एक भाजपा नेता सिंचाई विभाग के प्रमुख थे। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

राजस्व मंत्री और भाजपा के पूर्व राज्य अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने पवार की पिछले 25 वर्षों की चुप्पी पर सवाल उठाया। मंत्री बावनकुले ने कहा, "हमारे बीच यह समझौता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं होना चाहिए। हमें समझ नहीं आ रहा कि अजीत पवार इस तरह क्यों व्यवहार कर रहे हैं।"

बावनकुले ने कहा, "पवार एक वरिष्ठ नेता हैं, और हमें उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। अगर उनके पास 1999 में ये फाइलें और सबूत थे, तो वे अब तक चुप क्यों रहे? उन्हें तब इसका खुलासा कर देना चाहिए था।"

मंत्री बावनकुले ने सुझाव दिया कि पवार का यह आक्रोश आगामी पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों में एनसीपी की संभावनाओं के बारे में "नकारात्मक प्रतिक्रिया" का परिणाम हो सकता है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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