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केरल में कांग्रेस के गुटों के बीच मतभेद फिर से उभरने के बाद एआईसीसी के अगले कदम पर नजर

केरल में कांग्रेस के गुटों के बीच मतभेद फिर से उभरने के बाद एआईसीसी के अगले कदम पर नजर
केरल में कांग्रेस के गुटों के बीच मतभेद फिर से उभरने के बाद एआईसीसी के अगले कदम पर नजर

तिरुवनंतपुरम, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) संयोजक अडूर प्रकाश और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के अगले कदम पर सबकी नजर है। कांग्रेस एक बार फिर गुटबाजी की अपनी पुरानी लड़ाई में फंसी हुई दिख रही है। विवाद के और गहराने की आशंका के बीच दोनों गुट विरोधी गुट के अगले कदम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

इसकी शुरुआत तब हुई जब प्रकाश ने यूडीएफ और सरकार के बड़े फैसलों पर सलाह-मशविरा न किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। प्रकाश का कहना है कि उन्होंने यह कदम खुद उठाया और उनकी आलोचना यूडीएफ संयोजक के तौर पर उनके अपने अनुभव पर आधारित थी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वह अपनी शिकायतें एआईसीसी के सामने रखेंगे।

हालांकि, सतीशन गुट इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि प्रकाश का दखल एक अलग-थलग घटना थी। गुट के भीतर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सार्वजनिक आलोचना को आलाकमान के नेताओं का मौन समर्थन हासिल था।

केरल के लिए एआईसीसी की महासचिव दीपा दासमुंशी की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है। इस विवाद की जड़ में कांग्रेस की गुटबाजी की राजनीति का पुराना मसला है।

के. करुणाकरण और ए.के. एंटनी के दौर से लेकर ओमन चांडी के समय और अब सतीशन के नेतृत्व तक, केरल में पार्टी के कामकाज पर अंदरूनी गुटीय राजनीति का असर बार-बार देखा गया है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के सत्ता में लौटने के कुछ ही समय बाद इस विवाद ने उन गुटीय समीकरणों को फिर से हवा दे दी है। प्रकाश का गुट दखल के लिए एआईसीसी की ओर देख रहा है, जबकि सतीशन गुट यह देख रहा है कि क्या आलाकमान मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन करेगा या नहीं।

संगठनात्मक पुनर्गठन में हो रही देरी को भी गुट के नजरिए से देखा जा रहा है। एक धड़े को शक है कि इस प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है।

सतीशन सरकार के सत्ता संभालने और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ के बिजली मंत्री बनने के चार महीने बाद भी नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं हुआ है। इससे पार्टी को और शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है और यहां भी देरी की वजह गुटीय कलह ही है।

इस बीच, एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी के पास अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने के तरीके हैं और केंद्रीय नेतृत्व इस मामले को सुलझाने में पहल करेगा। उन्होंने यह भी साफ किया है कि वे ऐसे मतभेदों को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं हैं।

--आईएएनएस

ओपी/एएस

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