Samachar Nama
×

एआईएडीएमके की पूर्व मंत्री नीलोफर कफील सीएम स्टालिन की मौजूदगी में डीएमके में होंगी शामिल

चेन्नई, 14 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु में आगामी चुनावी माहौल के बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में नीलोफर कफील सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में शामिल होंगी।
एआईएडीएमके की पूर्व मंत्री नीलोफर कफील सीएम स्टालिन की मौजूदगी में डीएमके में होंगी शामिल

चेन्नई, 14 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु में आगामी चुनावी माहौल के बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में नीलोफर कफील सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में शामिल होंगी।

यह समारोह तिरुपत्तूर में आयोजित डीएमके के उत्तरी क्षेत्रीय नेताओं के एक बड़े प्रशिक्षण शिविर के दौरान होगा, जिसमें मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन की उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है, और इसे नीलोफर कफील के औपचारिक रूप से डीएमके में प्रवेश के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले दिन में नीलोफर कफील ने एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को इस्तीफा सौंपकर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की प्राथमिक सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग कर लिया।

उन्होंने त्यागपत्र में लिखा कि वह लंबे समय से पार्टी से जुड़ी रही हैं, लेकिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते संगठन के भीतर अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखने में असमर्थ हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले समर्थन और सम्मान के लिए पार्टी नेतृत्व तथा जिला स्तरीय नेताओं, विशेषकर तिरुपत्तूर क्षेत्र के पदाधिकारियों के प्रति आभार जताया।

नीलोफर कफील ने पिछली एआईएडीएमके सरकार के दौरान वानीयमबाड़ी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और श्रम कल्याण मंत्री के रूप में कार्य किया था। उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। इसके बजाय पार्टी ने यह सीट सेंथिलकुमार को आवंटित की, जिन्हें पूर्व मंत्री केसी वीरमणि का करीबी माना जाता है।

इस निर्णय के बाद नीलोफर कफील और केसी वीरमणि के बीच आंतरिक मतभेद उभरकर सामने आए, जिससे दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच भी असंतोष की स्थिति बनी।

बताया जाता है कि इसी विवाद के चलते उन्हें 2021 में एआईएडीएमके से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि दो वर्ष पूर्व उन्हें पुनः पार्टी में शामिल कर लिया गया, लेकिन इसके बाद उन्हें सीमित भूमिका ही दी गई और वह संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीएमके में उनका प्रवेश वेल्लोर क्षेत्र, विशेषकर तिरुपत्तूर और वानीयमबाड़ी के राजनीतिक समीकरणों पर प्रभाव डाल सकता है, जहां उनका अभी भी एक मजबूत जनाधार माना जाता है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

Share this story

Tags