'महाराष्ट्र में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर', आदित्य ठाकरे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
मुंबई, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को चुनाव आयोग (ईसीआई) पर निशाना साधते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
नई दिल्ली में विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हुए आदित्य ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता रिकॉर्ड में कथित आंकड़ों की गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कथित रूप से गायब मतदाताओं के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए और अपने आरोपों के समर्थन में कुछ आंकड़ों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, "मैं 'गोलमाल ग्यानू' (मुख्य चुनाव आयुक्त के संदर्भ में) द्वारा की गई पहली बड़ी हेराफेरी का खुलासा कर रहा हूं। महाराष्ट्र में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर है। चुनाव आयोग ने मई में एक आंकड़ा जारी किया और अगस्त में उससे बिल्कुल अलग आंकड़ा जारी कर दिया। 'गोलमाल ग्यानू' को बताना चाहिए कि ये मतदाता कहां गए। उन्हें राज्य में अचानक पांच लाख मतदाताओं के गायब होने पर जवाब देना चाहिए।"
उन्होंने कुछ विशेष विधानसभा क्षेत्रों में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। ठाकरे ने कहा कि भिवंडी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता रिकॉर्ड एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों से मेल नहीं खाते।
माहीम विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से लगातार मतदान करने वाले लोगों को भी अब नोटिस भेजे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जो लोग 2002 से लगातार वोट डाल रहे हैं, उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में होने के बावजूद उन्हें नोटिस मिल रहे हैं। यह किस तरह की व्यवस्था है?"
ठाकरे ने जमीनी स्तर पर मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इलाकों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे हैं, बल्कि लोगों को दस्तावेज पूरे करने के लिए फोन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया जाएगा और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोवा और राजस्थान जैसे राज्यों से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवाओं को रास्ते में हिरासत में लिया जा रहा है।
भविष्य की राजनीति को लेकर विश्वास जताते हुए ठाकरे ने कहा कि मौजूदा सरकार को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
ये राजनीतिक घटनाक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों के बीच सामने आए हैं।
महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अभ्यर्थियों ने पुणे में प्रदर्शन किया, जबकि नई दिल्ली में कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कई स्थानों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए ठाकरे ने आरोप लगाया कि देश में "अघोषित आपातकाल" जैसी स्थिति है और लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है तथा उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।
उन्होंने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों के प्रति शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन दोहराया और कहा कि पार्टी नेता संजय राउत भी आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं।
पुणे में छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और पेपर लीक मामलों में कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए।
उन्होंने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े चल रहे कानूनी विवाद का भी उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि इस मामले में अंततः निष्पक्ष फैसला आएगा।
--आईएएनएस
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