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एडीबी ने भारत में शहरी सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूर किया एक अरब डॉलर का लोन

एडीबी ने भारत में शहरी सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूर किया एक अरब डॉलर का लोन
एडीबी ने भारत में शहरी सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूर किया एक अरब डॉलर का लोन

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने भारत सरकार के शहरी सुधारों के एजेंडा के समर्थन के लिए एक अरब डॉलर का लोन मंजूर किया है। इसका उद्देश्य शहरों में आर्थिक विकास, इनोवेशन और जीवन स्तर में सुधार करना है।

एडीबी के अनुसार, 'अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन एंड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम' केंद्र के प्रमुख 'अर्बन चैलेंज फंड' (यूसीएफ) और उससे जुड़े सुधारों को लागू करने में मदद करेगा। इसका मकसद शहरी संस्थाओं को मजबूत करना, इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक और स्पेशल प्लानिंग को बेहतर बनाना और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को बढ़ाना है।

एडीबी ने आगे कहा कि यह प्रोग्राम मजबूत शहरी पुनर्निर्माण को बढ़ावा देगा, जिसमें यातायात-केंद्रित विकास और सार्वजनिक जगहों का बेहतर प्रबंधन शामिल है। साथ ही, यह म्युनिसिपल बॉन्ड और बाजार-आधारित दूसरे फाइनेंसिंग तरीकों के जरिए कमर्शियल कैपिटल तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद करेगा।

यह पारदर्शिता, कार्यकुशलता और सबूतों पर आधारित फैसले लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देकर शहरी प्रशासन को भी आधुनिक बनाएगा।

एडीबी आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का लंबे समय से सहयोगी रहा है।

2024 से, इसने शहरी विकास, शहर के पुनर्निर्माण, और जलापूर्ति व साफ-सफाई से जुड़े विश्लेषणात्मक कार्यों में सहयोग किया है, जिससे 'अर्बन चैलेंज फंड' की नींव रखने में मदद मिली है।

इसके अलावा, इस ग्लोबल बैंक ने प्रोग्राम को लागू करने में मंत्रालय की मदद के लिए 3 मिलियन डॉलर की टेक्निकल सहायता भी दी है।

एडीबी की भारत के लिए कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने कहा, "2047 तक पूरी तरह से विकसित देश बनने के 'विकसित भारत' के विजन को हासिल करने में भारत के शहर अहम भूमिका निभाएंगे।"

ओका ने आगे कहा, "पॉलिसी सपोर्ट, टेक्निकल सहायता और फाइनेंसिंग को मिलाकर, यह प्रोग्राम शहरी संस्थाओं को मजबूत करेगा, मार्केट-बेस्ड फाइनेंसिंग तक पहुंच बढ़ाएगा और इंफ्रास्ट्रक्चर व सर्विस डिलीवरी में सुधार करेगा, जिससे शहर भारत की ग्रोथ के अगले चरण को आगे बढ़ा सकेंगे।"

एडीबी ने बताया कि शहर अभी लगभग 70 प्रतिशत नई नौकरियां पैदा करते हैं और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 63 प्रतिशत का योगदान देते हैं, 2030 तक इस हिस्सेदारी के बढ़कर 75 प्रतिशत होने का अनुमान है। हालांकि, कई शहरी केंद्रों को अभी भी संस्थागत क्षमता, वित्तीय संसाधनों और मार्केट-बेस्ड फाइनेंसिंग तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

--आईएएनएस

एबीएस

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