20 देशों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने का कदम उठाया: ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीस
संयुक्त राष्ट्र, 28 सितंबर (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि 20 से अधिक देश सोशल मीडिया पर उम्र से जुड़ी पाबंदियां लागू कर रहे हैं या उन पर विचार कर रहे हैं। यह बात ऐसे समय में कही गई है, जब नेता डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बच्चों को होने वाले खतरों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।
अल्बानीज ने कहा कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के फैसले से दुनिया भर में इस दिशा में और कदम उठाने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा, "पहले से ही 20 से अधिक देश सोशल मीडिया पर उम्र से जुड़ी पाबंदियां लागू कर रहे हैं या कर चुके हैं। यूरोपीय समुदाय के भी कदम उठाने के साथ और भी कई देश ऐसा करने वाले हैं।"
ऑस्ट्रेलिया ने यह पाबंदी माता-पिता के एक अभियान के बाद लागू की, जिनका कहना था कि उनके बच्चों को सोशल मीडिया की वजह से नुकसान हुआ है। उनमें से कुछ माता-पिता ने पिछली बैठक के दौरान जनरल असेंबली को संबोधित भी किया था।
अल्बानीज ने इस कदम को तेजी से विकसित हो रही टेक्नोलॉजी से पैदा हुई समस्याओं पर देशों के मिलकर काम करने के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया।
उन्होंने कहा कि यूएन के मिशन को "दुनिया की सबसे अमीर कंपनियों को ठेके पर नहीं दिया जा सकता और न ही इसे टेक्नोलॉजी की रफ़्तार के हिसाब से तय किया जा सकता है।"
फ्रांस ने भी इस चेतावनी का समर्थन किया और बच्चों व किशोरों को ऐसी टेक्नोलॉजी से बचाने के लिए अधिक नियम बनाने की मांग की, जो उनकी सीखने की क्षमता पर असर डालती हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि कुछ डिजिटल टेक्नोलॉजी के संपर्क में आने वाले युवाओं की सीखने की क्षमता में कमी आ रही है।
मैक्रों ने कहा, "आइए, हम इसके बुरे नतीजों के सामने आने का इंतजार न करें।"
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बहस को सिर्फ अमेरिका, चीन और कुछ निजी कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इस टेक्नोलॉजी का सरकारों, अस्पतालों और वित्तीय प्रणालियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ब्रिटेन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना के माहौल में मौजूद खतरों को और बढ़ा देगा।
प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने आरोप लगाया कि विरोधी ताकतें बॉट्स, नकली वेबसाइटों और झूठी खबरों का इस्तेमाल करके लोगों के डर का फायदा उठा रही हैं और समाज में बंटवारे को बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम एआई में पारदर्शिता, तैयारी और सुरक्षा के लिए आम वैश्विक सिद्धांतों और मानकों को बनाने की दिशा में काम करेगा।
बर्नहम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े अहम फैसले इतने जरूरी हैं कि उन्हें किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता और ये फैसले जनता की सेवा करने वाली चुनी हुई सरकारों को लेने चाहिए।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने चेतावनी दी कि एआई क्रांति आर्थिक असमानता को बढ़ा सकती है और युवाओं में अपने भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया अपने तकनीकी विकास के फायदों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा करने के लिए एक ग्लोबल एआई हब प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बना रहा है।
इटली ने भी नियमों की जरूरत पर जोर दिया, लेकिन बहुत अधिक रेगुलेशन के खिलाफ चेतावनी दी। उप-प्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि नई तकनीकों से नई असमानताएं, निर्भरता और सत्ता का केंद्रीकरण होने का खतरा है।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बिना नियमों वाली तकनीक के हाथों में अपना भविष्य नहीं सौंप सकता। हालांकि, हमें ऐसे नौकरशाही वाले बंधनों की जरूरत नहीं है जिनका पालन सिर्फ कुछ ही लोग करें।
राष्ट्रपति जेवियर माइली ने कहा कि पिछली तकनीकी क्रांतियों को लेकर जो डर था, उससे आखिर में नौकरियों का वैसा नुकसान नहीं हुआ जैसा अनुमान लगाया गया था। अर्जेंटीना जल्दबाजी में नियम लागू करने से बचेगा और एआई विकसित करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन देगा।
माइली ने कहा, "डर को आज्ञाकारिता में नहीं बदलना चाहिए।"
अलग-अलग विचारों से एक बड़ी बहस सामने आई है कि क्या सरकारों को युवाओं की डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करनी चाहिए या कंपनियों को ऐसी सेवाओं को फिर से डिजाइन करने के लिए कहना चाहिए जिनसे बच्चे हानिकारक कंटेंट, लत लगाने वाले फीचर्स, गलत जानकारी और ऑनलाइन शोषण के संपर्क में आ सकते हैं।
ताजानी ने पारदर्शिता, निगरानी, सुरक्षा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की बात कही। अर्जेंटीना ने हल्के रेगुलेशन वाले नजरिए का सबसे मजबूती से समर्थन किया।
--आईएएनएस
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