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मिजोरम जेल से जाली आदेशों का इस्तेमाल करके 17 कैदियों को अवैध रूप से रिहा किया गया

आइजोल, 9 मई (आईएएनएस)। मिजोरम के लुंगलेई जिला जेल में बंद 17 कैदियों को, जिनमें दोषी और विचाराधीन कैदी शामिल थे, कथित तौर पर जाली अदालती दस्तावेजों और नकली रिहाई आदेशों का इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से रिहा कर दिया गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मिजोरम जेल से जाली आदेशों का इस्तेमाल करके 17 कैदियों को अवैध रूप से रिहा किया गया

आइजोल, 9 मई (आईएएनएस)। मिजोरम के लुंगलेई जिला जेल में बंद 17 कैदियों को, जिनमें दोषी और विचाराधीन कैदी शामिल थे, कथित तौर पर जाली अदालती दस्तावेजों और नकली रिहाई आदेशों का इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से रिहा कर दिया गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

रिहा किए गए ज्यादातर कैदियों का पता लगा लिया गया है और उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिजोरम पुलिस के अनुसार, 17 कैदियों को, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम' (पोक्सो), 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट' (एनडीपीएस) और चोरी से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था या जिन पर मुकदमा चल रहा था, इस साल 30 जनवरी से 18 मार्च के बीच लुंगलेई जिला जेल से अदालत के जाली दस्तावेजों के आधार पर रिहा कर दिया गया था।

एक विस्तृत बयान में मिजोरम पुलिस ने इस मामले को एक बड़े धोखाधड़ी के रूप में बताया, जिसमें कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए जाली अदालती आदेश शामिल थे।

यह मामला तब सामने आया जब 27 अप्रैल को लुंगलेई पुलिस स्टेशन को लुंगलेई न्यायिक जिले की जिला और सत्र न्यायाधीश आर लालदुहामी से एक एफआईआर प्राप्त हुई।

एफआईआर के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को हुई अदालती कार्यवाही के दौरान, लुंगलेई जिला जेल में बंद दो विचाराधीन कैदी अदालत के सामने पेश हुए। उनके पास ऐसे दस्तावेज थे, जो कथित तौर पर 13 अप्रैल को लुंगलेई न्यायिक जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत द्वारा और 10 अप्रैल को गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए थे।

इन दस्तावेजों में कथित तौर पर यह आदेश दिया गया था कि 50 हजार रुपए का जुर्माना अदा करने के बाद, उन्हें एक 'डिस्चार्ज बॉन्ड' पर रिहा कर दिया जाए। साथ ही, इन दस्तावेजों में उनकी सुनवाई के लिए 24 अप्रैल की तारीख भी तय की गई थी।

हालांकि, जज ने तुरंत ही दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां पकड़ लीं, क्योंकि वही दो कैदी 23 अप्रैल को पहले भी उनके सामने पेश हो चुके थे और उनकी अगली सुनवाई आधिकारिक तौर पर 8 मई, 2026 के लिए तय की गई थी।

पुलिस के बयान के अनुसार, शक होने पर जज खुद लुंगलेई जिला जेल गईं ताकि दस्तावेजों की सच्चाई की जांच कर सकें और जेल अधिकारियों से इस बारे में स्पष्टीकरण मांग सकें। जांच ​​के दौरान पता चला कि ये दोनों विचाराधीन कैदी कोई अकेले मामले नहीं थे, बल्कि कई अन्य कैदियों ने भी कथित तौर पर जाली अदालती आदेशों और मनगढ़ंत न्यायिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जेल से रिहाई पा ली थी।

इस खुलासे के बाद, लुंगलेई पुलिस स्टेशन में औपचारिक रूप से एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर पुलिस जांच शुरू हो गई। तेजी से कार्रवाई करते हुए, लुंगलेई पुलिस ने उन 15 कैदियों का पता लगाने के लिए एक अभियान चलाया, जिनकी पहचान शुरू में जाली दस्तावेजों के जरिए रिहा हुए कैदियों के तौर पर की गई थी। इनमें से 11 कैदियों को दोबारा गिरफ्तार करके लुंगलेई जिला जेल वापस भेज दिया गया। एक आरोपी अभी भी फरार है, जबकि दूसरे को खॉजॉल जिला पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच के शुरुआती चरण में ही 13 लोगों का पता लगा लिया गया था। बाद की जांच में पता चला कि जाली दस्तावेजों के जरिए रिहा हुए कैदियों की कुल संख्या असल में 17 थी।

पुलिस ने बताया कि रिहा हुए कैदियों में ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम' (पोक्सो एक्ट), 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट' (एनडीपीएस एक्ट) और चोरी से जुड़े गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था या जिन पर मुकदमा चल रहा था। जांचकर्ताओं ने दो मुख्य आरोपियों की भी पहचान की है, जिन्होंने कथित तौर पर इस धोखाधड़ी वाले काम को अंजाम दिया था। इन दोनों आरोपियों को 1 मई को गिरफ्तार किया गया और 7 मई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस जांच के अनुसार, जेरेमिया लालथांगतुरा ने कथित तौर पर कैदियों को यह कहकर धोखा दिया कि वह उनके मामलों में अपील की व्यवस्था कर सकता है और अपने जान-पहचान के एक वकील के जरिए उन्हें कानूनी सहायता दिला सकता है। पुलिस का दावा है कि उसने कैदियों को रिहा करवाने के बदले उनसे 4,000 रुपए से लेकर 50,000 रुपए तक की रकम वसूली थी। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि इस पूरे काम के जरिए लगभग 1.35 लाख रुपये की रकम जुटाई गई थी।

पुलिस के बयान के अनुसार, जाली अदालती दस्तावेज कथित तौर पर राहसी वेंग स्थित एक फोटोकॉपी और प्रिंटिंग की दुकान के कंप्यूटरों पर और लुंगलेई जिला जेल के दफ्तर में रखे एक कंप्यूटर पर तैयार किए गए थे। पुलिस ने उन कंप्यूटरों और प्रिंटरों को जब्त कर लिया है, जिनका कथित तौर पर जाली दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल किया गया था। इन उपकरणों को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच जारी है और आगे और भी गिरफ्तारियां या खुलासे हो सकते हैं।

--आईएएनएस

पीएसके

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