इस्तेमाल किए गए कपड़े इकट्ठा करने के लिए दिल्ली मेट्रो के 10 और अर्पण सेंटर बनाने की योजना: सीएम रेखा गुप्ता
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन स्टेशनों पर बने 'अर्पण केंद्रों' ने 31 अगस्त तक 41 टन इस्तेमाल किए गए कपड़े जमा किए हैं और सरकार ऐसी 10 और सुविधाएं खोलने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो लोग पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें सही तरीके से ठिकाने लगाने को लेकर परेशान हैं, उनके लिए दिल्ली मेट्रो के 'अर्पण सेंटर' एक काम का विकल्प बनकर उभरे हैं।
दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बने इन सेंटरों में लोग वे कपड़े जमा कर सकते हैं जिनकी उन्हें अब जरूरत नहीं है या जिनका वे इस्तेमाल नहीं करते।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि इन कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल, अपसाइकिलिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए काम की चीजों में बदला जाता है।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि 31 अगस्त तक, कुल 3,940 लोगों ने 10 अर्पण सेंटरों पर 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा किए थे।
उन्होंने कहा, "बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल सेंटर पर सबसे ज्यादा 9,861.40 किलोग्राम कपड़े जमा हुए, इसके बाद शालीमार बाग सेंटर पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा हुए।"
एक सरकारी बयान में कहा गया, "पंजाबी बाग वेस्ट सेंटर पर 6,534.98 किलोग्राम कपड़े जमा हुए, जबकि शाहदरा सेंटर पर 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। दूसरे सेंटरों पर जमा कपड़ों की मात्रा इस प्रकार थी: मयूर विहार-I में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-काकरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम। पांच सेंटर 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि बाकी सेंटर 12 और 17 अगस्त को चालू हुए।"
अर्पण सेंटरों का दायरा बढ़ाने के लिए अब 10 और सेंटर खोलने का प्रस्ताव रखा गया है। ये सेंटर जनवरी 2027 में खोले जाने का प्रस्ताव है। इनमें मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।
अर्पण सेंटरों पर जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जा रहा है और उनके इस्तेमाल के हिसाब से आगे की प्रोसेसिंग के लिए भेजा जा रहा है। मिले सामान का कुछ हिस्सा दोबारा इस्तेमाल और अपसाइकिलिंग के लिए अलग रखा गया, जबकि बड़ी मात्रा रीसाइक्लिंग के लिए भेजी गई।
दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त तक लगभग 4,266 किलोग्राम सामान दोबारा इस्तेमाल/अपसाइकिलिंग के लिए और 29,424 किलोग्राम सामान रीसाइक्लिंग के लिए तय किया गया था।
आधिकारिक बयान में कहा गया, "सेल्फ-हेल्प ग्रुप इन कपड़ों का इस्तेमाल करके गलीचे, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी काम की चीजें बना रहे हैं। इन उत्पादों को अर्पण केंद्रों पर भी दिखाया जा रहा है। इस तरह, लोगों द्वारा दान किए गए पुराने कपड़ों को सिर्फ कचरा बनने के बजाय नई, काम की चीजों में बदला जा रहा है।"
इसमें कहा गया, "पुराने कपड़ों से बने उत्पाद इन केंद्रों पर बेचे भी जा रहे हैं। 10 अर्पण केंद्रों में कुल 27,036 रुपए की बिक्री दर्ज की गई है।"
इसमें आगे कहा गया, "इस पहल का एक अहम पहलू यह है कि पुराने कपड़ों को सिर्फ इकट्ठा ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें काम की चीजों में बदलकर बेचा भी जा रहा है। इससे पुराने कपड़ों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक व्यावहारिक सिस्टम बनाने में मदद मिल रही है।"
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र एक अहम पहल है जो पुराने कपड़ों को सही ढंग से निपटाने की समस्या का व्यावहारिक समाधान देती है और साथ ही उन्हें दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग के जरिए काम की चीजों में बदलने में मदद करती है।
उन्होंने कहा, "दिल्ली के निवासियों की भागीदारी इस सिस्टम को और बढ़ाने में मदद कर सकती है। हमारी कोशिश है कि लोग आसानी से पुराने कपड़े दान कर सकें और उनका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो, जिससे दिल्ली को साफ़, सुंदर और हरा-भरा बनाने की कोशिशें और मजबूत हों।"
--आईएएनएस
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