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हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस: संघर्ष से समृद्धि तक हिमाचल की कहानी

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के लिए 25 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव है, जिसने बिखरे पहाड़ी इलाकों को एक शानदार पहचान दी और पहचान को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया। जब पूरा प्रदेश 25 जनवरी को हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस मना रहा है तो यह दिन अतीत के संघर्ष, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य के सपनों को एक साथ जोड़ देता है।
हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस: संघर्ष से समृद्धि तक हिमाचल की कहानी

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के लिए 25 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव है, जिसने बिखरे पहाड़ी इलाकों को एक शानदार पहचान दी और पहचान को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया। जब पूरा प्रदेश 25 जनवरी को हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस मना रहा है तो यह दिन अतीत के संघर्ष, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य के सपनों को एक साथ जोड़ देता है।

आजादी के बाद हिमाचल का रास्ता आसान नहीं था। 15 अप्रैल 1948 को यह क्षेत्र पहली बार अस्तित्व में आया। बिखरी पहाड़ी रियासतों को एक प्रशासनिक ढांचे में पिरोना अपने आप में एक चुनौती थी। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के साथ हिमाचल प्रदेश ‘ग’ श्रेणी का राज्य बना, एक अस्थायी पहचान, लेकिन स्थायी सपनों के साथ। समय के साथ हिमाचल का भूगोल और भाग्य दोनों बदलते रहे।

1 जुलाई 1954 को बिलासपुर का विलय हुआ। 1 जुलाई 1956 को हिमाचल केंद्रशासित प्रदेश बना और 1 नवंबर 1966 को कांगड़ा और पंजाब के अन्य पहाड़ी क्षेत्र जुड़े, लेकिन तब भी राज्यहुड का सपना अधूरा था। आखिरकार, संसद द्वारा दिसंबर 1970 में पारित हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम ने इतिहास की दिशा बदली। 25 जनवरी 1971 वह दिन था जब हिमाचल प्रदेश भारतीय गणराज्य का 18वां राज्य बना। यह सिर्फ प्रशासनिक घोषणा नहीं थी, बल्कि पहाड़ों की आवाज को संवैधानिक पहचान मिलने का क्षण था।

राज्य बनने के बाद हिमाचल ने लंबा सफर तय किया। सीमित संसाधन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद प्रदेश ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए। अलग-अलग सरकारों ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली उत्पादन और उद्योगों को विकास का आधार बनाया।

वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2.27 ट्रिलियन रुपए रहा। वित्त वर्ष 2025 (अगस्त तक) में राज्य का निर्यात 223.20 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, जिसमें दवा निर्माण और जैविक उत्पादों का योगदान 69.5 फीसदी रहा। यह बताता है कि हिमाचल अब सिर्फ पर्यटन की भूमि नहीं, बल्कि फार्मा और ऑर्गेनिक हब के रूप में भी उभर रहा है।

हिमाचल की ताकत उसकी नदियां, पहाड़ और लोग हैं। यहां की संस्कृति सादगी सिखाती है और प्रकृति जिम्मेदारी। यही कारण है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन हिमाचल की पहचान बना हुआ है। जलविद्युत, सेब की खेती, जैविक कृषि और पर्यटन—ये सभी मिलकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस हमें याद दिलाता है कि राज्य संकल्प से बनते हैं। 1948 से 1971 तक का संघर्ष और उसके बाद की विकास यात्रा इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ अगर मजबूत इरादों के साथ खड़े हों तो समय भी उनके सामने झुक जाता है। 25 जनवरी की तारीख यही संदेश देती है कि पहचान इतिहास से मिलती है, तरक्की मेहनत से, और भविष्य हम सबके साझा प्रयास से।

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी

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