हिमाचल प्रदेश : कुल्लू का शरण गांव बना हथकरघा का केंद्र, पारंपरिक कला से खुले आमदनी के रास्ते
कुल्लू, 7 अगस्त (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के पास नाग्गर क्षेत्र की रुम्सू पंचायत में बसा शरण गांव अब अपनी हथकरघा कला के लिए जाना जाता है। साल 2020 में वस्त्र मंत्रालय ने इसे 'हथकरघा गांव' घोषित किया था। इसके बाद यहां के कारीगरों खासकर महिलाओं के लिए रोजगार और आमदनी के नए रास्ते खुले हैं।
कपड़ा मंत्रालय के एक सर्वे में पाया गया था कि शरण गांव के करीब 95 फीसदी घर पारंपरिक काठ-कुणी शैली से बने हैं और यहां के कई लोग पहले से ही हथकरघा बुनाई का काम करते हैं। इसी आधार पर गांव को हथकरघा गांव का दर्जा मिला।
यहां की एक स्थानीय कारीगर ने आईएएनएस से बताया, "हथकरघा बुनाई हमारे परिवार में पीढ़ियों से होती आई है। हम आमतौर पर 14-15 साल की उम्र में ही ये काम सीखना शुरू कर देते हैं।"
पहले गांव में बनने वाले पट्टू शॉल, टोपियां और अन्य ऊनी सामान सिर्फ घर के इस्तेमाल के लिए होते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।
कारीगरों के मुताबिक, स्वयं सहायता समूह की मदद से उन्हें इस इमारत में एक दुकान मिली। इसके बाद से काम बड़े स्तर पर होने लगा।
उन्होंने कहा, "साल 2020 के आसपास 20 से 25 लोगों को 45 दिनों की ट्रेनिंग भी दी गई थी। इससे अब महीने की 10 से 15 हजार रुपए तक महिलाओं की कमाई हो जाती है।"
दुकान मिलने के बाद यहां शॉल, स्टोल, पट्टू, मफलर और तरह-तरह के क्रोशिया उत्पाद बनाए जाने लगे हैं। कारीगर अब पर्यटकों की पसंद को ध्यान में रखकर सामान तैयार करते हैं।
एक अन्य कारीगर ने बताया, "पहले हम पट्टू सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए बनाते थे। हथकरघा भवन बनने और दुकान मिलने के बाद से अब हम इन्हें बिक्री के लिए भी बनाने लगे हैं। इससे हमारी आय का जरिया खुल गया है। हम देखते हैं कि पर्यटकों को क्या पसंद है और उसी हिसाब से उत्पाद बनाते हैं।"
एक और महिला कारीगर ने कहा, "ट्रेनिंग और हथकरघा सहयोग मिलने के बाद हमने शॉल, स्टोल, मफलर और क्रोशिया का सामान बनाना शुरू किया। इससे हमें बहुत फायदा मिला है। पहले जो काम करते थे, वह हम खुद के लिए बनाते थे, लेकिन अब इससे हमें इनकम भी मिल रही है।"
सरकार की इस पहल से शरण गांव की पारंपरिक कला को नई पहचान मिली है। घरों में चलने वाला काम अब बाजार से जुड़ गया है। इससे न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भरता मिली है, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिला है।
--आईएएनएस
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