हिजाब को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर मौलाना शहाबुद्दीन बोले- स्कूल के नियमों को मानना चाहिए
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। हिजाब को लेकर हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी, कांग्रेस नेता शकील अहमद खान और ताजमहल उर्स कमेटी के अध्यक्ष ताहिरुद्दीन ताहिर की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिजाब और स्कूल यूनिफॉर्म कोड को लेकर एक फैसला सुनाया है। यह याचिका इलाहाबाद के अत्तारसुइया इलाके की एक नाबालिग लड़की ने दायर की थी। फैसला सुनाते हुए जजों ने कहा कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है। यहां दो बातें हैं, स्कूल यूनिफॉर्म कोड और हिजाब। ये दोनों अलग-अलग मामले हैं और इन्हें एक साथ नहीं देखा जाना चाहिए। असल में, स्कूल की चारदीवारी के भीतर स्कूल के अपने नियम होते हैं और उन्हें अपनाना चाहिए।"
कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने कहा, "पहली बात तो यह है कि यह कोई बड़ी बहस का मुद्दा नहीं होना चाहिए, फिर भी हम लगातार देखते हैं कि मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषय उठाए जाते हैं। हिजाब और शालीनता से शरीर ढकने का विचार एक निजी पसंद है। अगर आप पारंपरिक रूप से भारतीय समाज को देखें, तो सिर्फ मुस्लिम महिलाएं ही हिजाब या 'घूंघट' नहीं पहनतीं या 'ओढ़नी' से सिर नहीं ढकतीं। यह हमारी साझा सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है।"
शकील ने कहा, "आप कहीं भी जाएं, हमारे अपने गांवों और घरों में, बहुएं और बेटियां अपना सिर ढकती हैं, यह हमेशा से होता आया है। अब, स्कूलों के अपने नियम होते हैं, लेकिन हमारा मानना है कि अगर कोई हिजाब पहनना या 'ओढ़नी' से सिर ढकना चुनता है, तो उन्हें ऐसा करने की इजाजत दी जानी चाहिए। हालांकि, इसे बहस का मुख्य मुद्दा बनाना पूरी तरह से बेमतलब है।"
ताजमहल उर्स कमेटी के चेयरमैन ताहिरुद्दीन ताहिर ने कहा, "आप स्कूल हिजाब पहनकर जाएं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन स्कूल के बाहर कहीं भी हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं है। स्कूलों की एक तय यूनिफॉर्म होती है और छात्रों को उसी यूनिफॉर्म में स्कूल जाना चाहिए। यह हमारे देश की सरकार का फैसला है, और हमें इसे मानना चाहिए, चाहे हम किसी भी समुदाय से हों।"
--आईएएनएस
एसडी/पीएम

