हजारों सफाई कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे, निजीकरण वापस ले सरकार: सीपीआई
चेन्नई, 21 जून (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने तमिलनाडु सरकार से राज्य के नगर निगमों में सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन सेवाओं के निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह कदम हजारों सफाई कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है और सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर करेगा।
सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने शनिवार को कहा कि सरकार तांबरम, अवाडी, होसुर, वेल्लोर, कोयंबटूर, इरोड, सलेम, तिरुप्पुर, मदुरै और तूतीकोरिन समेत कई नगर निगमों में सफाई सेवाएं निजी एजेंसियों को सौंपने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि सफाई कार्य एक आवश्यक और स्थायी सार्वजनिक सेवा है, जिसका सीधा संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी नागरिकों के कल्याण से है। वीरपांडियन के अनुसार स्थानीय निकायों में कार्यरत बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी ऐतिहासिक रूप से वंचित और पिछड़े समुदायों से आते हैं और उनकी आजीविका इन्हीं नौकरियों पर निर्भर है।
उन्होंने कहा, “ऐसे समाज में जहां आज भी जाति आधारित असमानताएं मौजूद हैं, सफाई कर्मचारियों को ऐसे रोजगार तंत्र में धकेलना अन्यायपूर्ण है जहां उन्हें नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन, पेंशन और अन्य श्रम अधिकार नहीं मिलते।”
सीपीआई नेता ने कहा कि पार्टी हमेशा सफाई सेवाओं में ठेका और निजी व्यवस्था का विरोध करती रही है। उनका आरोप है कि निजी ठेकेदारी व्यवस्था ने मजदूरों के शोषण को बढ़ावा दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि सीपीआई और विभिन्न वामपंथी संगठनों व ट्रेड यूनियनों ने पहले भी सफाई कार्यों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन किए थे।
वीरपांडियन ने कहा कि पिछली सरकारों ने कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा संबंधी मांगों को नजरअंदाज करते हुए निजी भागीदारी बढ़ाई थी। उन्होंने वर्तमान सरकार से उस नीति को बदलने और स्थानीय निकायों में सार्वजनिक क्षेत्र के रोजगार को मजबूत करने की अपील की।
सीपीआई ने सफाई कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाने की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि सरकार को आधुनिक तकनीक, मशीनीकृत सफाई व्यवस्था और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि धीरे-धीरे मैनुअल सफाई पर निर्भरता कम हो।
साथ ही, वर्तमान में सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों को वैकल्पिक रोजगार, कौशल विकास कार्यक्रम और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई, ताकि तकनीकी बदलाव के कारण उनकी नौकरियां प्रभावित न हों।
वीरपांडियन ने कहा, “सरकार को निजीकरण की बजाय सामाजिक न्याय, श्रमिक कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।”
--आईएएनएस
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