हस्तशिल्प विश्वविद्यालय की दिशा में काम जारी, बुनकरों-शिल्पकारों को मिलेगी नई पहचान : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
लखनऊ, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में हस्तशिल्प विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे बुनकरों, शिल्पकारों और उनके बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास तथा रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने और कारीगरों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए सरकार और विभिन्न संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। राजभवन स्थित जनभवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के दौरान राज्यपाल ने नाबार्ड के सहयोग से बागपत, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, बाराबंकी, आजमगढ़, कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, हापुड़ और उन्नाव समेत प्रदेश के 13 जिलों के बुनकरों एवं शिल्पकारों की हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
उन्होंने हस्तनिर्मित वस्त्रों और उत्पादों की गुणवत्ता, कलात्मकता तथा पारंपरिक शिल्पकला की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने बुनकरों और शिल्पकारों से संवाद कर उनके उत्पादों के विपणन, बिक्री और आजीविका से जुड़े मुद्दों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए 'क्राफ्ट्स रूट्स' संस्था निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में 17 हस्तशिल्पियों को डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की जा चुकी है। इससे स्थानीय शिल्प को नई पहचान मिली है और कारीगरों का सम्मान भी बढ़ा है।
आनंदीबेन पटेल ने बताया कि पूर्वांचल में 'ग्रीन आर्मी' से जुड़ी करीब 2,500 महिलाएं पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन का उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं परित्यक्त वस्त्रों से बैग और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्हें सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे उनके उत्पादों की बिक्री और आय दोनों में वृद्धि हुई है।
उन्होंने बुनकरों और शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक वर्ष फरवरी के प्रथम सप्ताह में जन भवन में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करें, ताकि उन्हें अधिक से अधिक बाजार और खरीदार मिल सकें।
इस अवसर पर 'क्राफ्ट्स रूट्स' की संस्थापक अनारबेन पटेल ने बताया कि संस्था के माध्यम से देशभर में लगभग 75 हजार महिलाएं हस्तशिल्प और स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ी हैं। संस्था उन्हें कौशल प्रशिक्षण देने के साथ उनके उत्पादों के विपणन और बाजार उपलब्ध कराने में भी सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय पारंपरिक शिल्प और हस्तकला के अध्ययन के लिए विदेशों से भी विद्यार्थी संस्था में इंटर्नशिप करने आते हैं।
--आईएएनएस
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