हरियाणा में छात्राओं को 'उठक-बैठक' की सजा देने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
चंडीगढ़, 19 मार्च (आईएएनएस)। हरियाणा के हिसार जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं को कथित तौर पर अपमानजनक सजा देने का मामला सामने आने के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
यह घटना हिसार के अग्रोहा ब्लॉक के जगरान गांव स्थित सरकारी हाईस्कूल की बताई जा रही है, जहां छात्राओं को 'उठक-बैठक' की सजा दी गई और स्कूल परिसर में घुमाया गया। इस घटना को लेकर सामने आए वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना से जुड़े तीन वीडियो सामने आए, जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को ईमेल के जरिए भेजा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने एक जांच समिति का गठन किया है।
वहीं, आयोग के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने कहा कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का गंभीर उल्लंघन होगा।
आयोग ने कहा कि अनुशासन के नाम पर किसी भी तरह की शारीरिक सजा या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता। छात्राओं को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना न सिर्फ उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे राष्ट्रीय अभियानों की भावना के भी खिलाफ है।
आयोग ने कहा कि स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील माहौल तैयार करें। ऐसे मामलों का छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और शिक्षा व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर होता है।
आयोग ने आदेश में कहा कि बच्चों के पालन-पोषण और सही मार्गदर्शन की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की भी होती है। अनुशासन के लिए सकारात्मक और बच्चों के अनुकूल तरीकों को अपनाना चाहिए, जिसमें सहानुभूति और मार्गदर्शन हो, न कि हिंसा।
प्राथमिक जांच में यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत छात्राओं के गरिमा के अधिकार का उल्लंघन भी प्रतीत होता है।
मानवाधिकार आयोग ने एसपी से पूछा है कि क्या इस मामले में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज की गई है, जांच की स्थिति क्या है और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई होगी।
आईएएनएस
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