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हर समस्या का हल संवाद से हो सकता है: जैन आचार्य लोकेश मुनि

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की अधिकारियों के साथ हुई झड़प पर जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल संवाद से नहीं निकाला जा सकता। हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है।
हर समस्या का हल संवाद से हो सकता है: जैन आचार्य लोकेश मुनि

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की अधिकारियों के साथ हुई झड़प पर जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल संवाद से नहीं निकाला जा सकता। हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि मेरे लिए सभी बहुत आदरणीय हैं। मैं सभी शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं, महामंडलेश्वरों, संतों और महंतों का सम्मान करता हूं। मैं तो उनके सामने कुछ नहीं। मैं बस इतनी ही विनम्रता से कहना चाहता हूं कि मामला चाहे जो भी हो, उसे समझदारी, बातचीत, शांति, प्यार और सद्भावना से एक साथ बैठकर सुलझाना कहीं बेहतर होगा, क्योंकि आज कम्युनिकेशन और मीडिया का युग है, बातें मीडिया के माध्यम से तेजी से फैलती हैं, फिर लोग अपनी-अपनी राय जोड़ देते हैं और ऐसी परिस्थितियों में इसका हमारी पीढ़ी तथा आने वाली पीढ़ी पर अच्छा असर नहीं पड़ता।

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा, "मैं सलाह देने वाला नहीं हूं, मैं तो बस प्रार्थना कर सकता हूं कि चाहे संत हों, सरकार हो या प्रशासन-सभी मिलकर बंद कमरे में शांति से संवाद करके इस विषय को सुलझा लें। धर्म और अध्यात्म से जुड़े लोगों को अपनी बात को बंद कमरे में सुलझा लेना चाहिए, मीडिया के सामने नहीं जाना चाहिए।

लोकेश मुनि ने कहा कि हम राम कथा के माध्यम से सभी से अपील करते हैं कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल संवाद से नहीं निकाला जा सकता।

स्वामी बालकानंद गिरि ने कहा कि राम कथा का अर्थ यह है कि राम सभी के हैं, पूरी सृष्टि के पालनकर्ता राम हैं। आज जो राम कथा का आयोजन किया गया है, इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि भारत का सनातन जोड़ता है, तोड़ता नहीं है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के मामले में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद बहुत बड़ा है, लेकिन यह भी प्रमाणित होना चाहिए कि कौन असली शंकराचार्य है। योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है। इस मामले में हम किसी की निंदा नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समस्त देश के संन्यासियों को बैठकर इस बात पर चिंतन-मंथन करना चाहिए कि तत्काल रूप से समाज को संदेश दिया जाए-सन्यास की परंपरा पूजनीय है और पूजनीय रहेगी।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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