हर परिवार, हर मोहल्ले में 'मुखबिर', हंगरी खोलेगा कम्युनिस्ट शासन से जुड़े हजारों एजेंटों के नाम
बुडापेस्ट, 2 नवंबर (आईएएनएस)। हंगरी की नई सरकार 4 नवंबर को इतिहास के पन्नों से धूल हटाने का काम करने वाली है। वो कम्युनिस्ट शासन के दौर में सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम करने वाले हजारों मुखबिरों के नाम सार्वजनिक करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य देश के अतीत से जुड़े दबे हुए सच को सामने लाना और जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बहाल करना है।
हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर माग्यार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी तस्दीक भी की। उन्होंने लिखा, "तिस्जा (उनकी सियासी पार्टी) के प्रमुख वादों में से एक को पूरा करते हुए, हम 4 नवंबर को तानाशाही के दौर की गुप्त पुलिस फाइलों को सार्वजनिक करेंगे। यह कई परिवारों के लिए एक कठिन और संवेदनशील मामला होगा, लेकिन अतीत का सामना किए बिना कोई वास्तविक राजनीतिक बदलाव नहीं आ सकता।"
मतलब स्पष्ट है कि बुधवार, 4 नवंबर को एक ऑनलाइन डेटाबेस जारी किया जाएगा। जिसके जरिए आम लोग 1945 से 1989 के बीच देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम करने वाले मुखबिरों के नाम खोज सकेंगे। कथित तौर पर उस दौर में हंगरी की कम्युनिस्ट सरकार ने समाज पर निगरानी रखने और विरोध की आवाजों को दबाने के लिए मुखबिरों का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।
वर्तमान सत्ता का मानना है कि नेटवर्क में शामिल कुछ लोगों को ब्लैकमेल या दबाव डालकर अपने पड़ोसियों, दोस्तों, सहकर्मियों और यहां तक कि परिवार के सदस्यों की जानकारी देने के लिए मजबूर किया गया था, जबकि कुछ अन्य लोगों को विभिन्न लाभों का लालच देकर इस काम में शामिल किया गया था।
करीब चार दशक तक सक्रिय रहे इस नेटवर्क की वास्तविक सीमा आम लोगों से छिपी रही। सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के ऐतिहासिक अभिलेखागार के तहखाने में रखी गईं इन फाइलों तक दशकों से आम जनता की पहुंच नहीं थी। इनके खुलासे की मांग कई बार उठी और कुछ दस्तावेज लीक भी हुए, लेकिन पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
पीएम माग्यार ने अप्रैल में हुए संसदीय चुनावों से पहले अपने अभियान के दौरान इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने सितंबर में इसके लिए कानून पारित किया। सर्वेक्षणों के अनुसार, देश के दो-तिहाई से अधिक लोग इस फैसले का समर्थन करते हैं। पहले इन फाइलों को 1956 की सोवियत विरोधी क्रांति की वर्षगांठ पर सार्वजनिक करने की योजना थी, लेकिन बाद में इसकी तारीख बदलकर 4 नवंबर कर दी गई।
सामाजिक संबंध एवं संस्कृति मंत्री जोल्टान तार ने फेसबुक पर लिखा, ''एक लोकतांत्रिक समाज को अपने अतीत को जानने का अधिकार है।'' अब तक मुखबिरों की रिपोर्ट तक केवल शोधकर्ताओं और पीड़ितों के परिजनों की पहुंच थी। इतिहासकारों का मानना है कि नई ऑनलाइन व्यवस्था से हंगरी के पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट देशों में सबसे पारदर्शी सुरक्षा अभिलेखागार बनने की संभावना है।
इतिहासकारों का अनुमान है कि, इन फाइलों में करीब 50 हजार से 60 हजार लोगों के नाम दर्ज हैं और उनमें से लगभग 10 प्रतिशत लोग ही आज जीवित हैं। हंगरी में इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने को लेकर पिछले तीन दशकों से बहस चलती रही है। पूर्वी जर्मनी ने 1992 में अपनी कुख्यात स्टासी गुप्त पुलिस की फाइलें खोली थीं, जबकि चेक गणराज्य में 2003 में लोगों को इन अभिलेखों तक पहुंच मिली। लातविया ने 2018 में मुखबिरों से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की थीं।
--आईएएनएस
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