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हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक होगी : महुआ मोइत्रा

कोलकाता, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान संपन्न हो गया। कई जगहों पर आम मतदाताओं के साथ मारपीट की शिकायतें सामने आईं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा।
हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक होगी : महुआ मोइत्रा

कोलकाता, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान संपन्न हो गया। कई जगहों पर आम मतदाताओं के साथ मारपीट की शिकायतें सामने आईं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा।

महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, "अमित शाह की सेना मतदान के दिन आम जनता पर अत्याचार करते हुए एक निर्दोष बच्चे को भी चोट पहुंचाने से नहीं रुकती। आम नागरिकों का आक्रोश देखिए।"

दूसरे पोस्ट में महुआ मोइत्रा ने लिखा, "यह बंगाल में सक्रिय अमित शाह के भाड़े के 'जल्लादों' को सीधा अल्टीमेटम है। अपनी अंधाधुंध हिंसा और आतंक को जारी रखना आपके अपने जोखिम पर होगा। आपमें से हर एक, चाहे वर्दी में हो या नहीं, जो निर्दोष बंगालियों पर हाथ उठा रहा है, मतदाताओं पर हमला कर रहा है और आम जनता को आतंकित कर रहा है, उसे ढूंढ निकाला जाएगा और कानून के तहत पूरी सजा भुगतनी पड़ेगी। कोई आपको बचाने वाला नहीं है। न दिल्ली में बैठे आपके राजनीतिक आका, न गुजरात के आपके संरक्षक, और निश्चित रूप से अमित शाह भी नहीं।"

उन्होंने आगे लिखा, "आपने एक निर्दोष बच्चे पर हमला करके बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। इस तरह की बर्बरता किसी भी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। निर्दोष मतदाताओं पर आप जो अकारण हिंसा और राज्य प्रायोजित आतंक फैला रहे हैं, उसे याद रखा जाएगा, दर्ज किया जाएगा और उसका पूरा बदला लिया जाएगा। हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक होगी, लेकिन यह निर्मम और निर्णायक होगी।"

वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा पर तंज कसा। मनोज झा ने एक्स पर लिखा, "ऐसा लगता है कि बंगाल में एक बार फिर कुछ भी कारगर नहीं हुआ, न तो झारग्राम में न झालमुड़ी में, न ही बंगाल से सटे राज्य सिक्किम में फुटबॉल। पुराने फॉर्मूले नाकाम रहे, प्रतीकात्मक प्रयास बेअसर साबित हुए और उधार लिया गया उत्साह जमीनी राजनीति का विकल्प नहीं बन सका। भावनात्मक जुड़ाव के बिना क्षेत्रीय समीकरण शायद ही कभी टिक पाते हैं। अब, 2031 के लिए नए सिरे से शुरुआत करें।"

--आईएएनएस

ओपी/एबीएम

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