हलाल सर्टिफिकेशन पर बढ़ा विवाद, संतों और हिंदू संगठनों ने गोकुल डेयरी के खिलाफ उठाई आवाज
अयोध्या/नासिक, 30 मई (आईएएनएस)। डेयरी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में बहस तेज हो गई है। गोकुल डेयरी प्रोडक्ट्स को मिले हलाल सर्टिफिकेशन के विरोध में कुछ हिंदू संगठनों द्वारा चलाए जा रहे बहिष्कार अभियान को अब कई संत-महात्माओं और धार्मिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
अयोध्या, नासिक और अन्य स्थानों के संतों ने इस मुद्दे को धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपराओं से जोड़ते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
अयोध्या स्थित साकेत भवन के सीताराम दास पीठाधीश्वर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि गोकुल डेयरी उत्पादों के खिलाफ चलाया जा रहा बहिष्कार अभियान सराहनीय है। गाय के दूध से निर्मित उत्पादों पर हलाल जैसे शब्द का उपयोग सनातन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हलाल सर्टिफिकेशन केवल एक व्यावसायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक व्यापक वैचारिक अभियान का हिस्सा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत में हलाल शब्द के उपयोग और उससे जुड़े प्रमाणन तंत्र की समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर इस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए।
सीताराम दास ने कहा कि भारत को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि किसी विशेष प्रकार के प्रमाणन की आवश्यकता कुछ देशों में है तो उसका उपयोग वहीं तक सीमित रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न समुदायों और धार्मिक परंपराओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, वरुण दास जी महाराज ने भी हिंदू संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर जिस प्रकार की व्यवस्था बनाई गई है, उसका एक बड़ा आर्थिक पक्ष भी है। दूध, दही, घी और अन्य शाकाहारी उत्पाद पहले से ही निर्धारित मानकों और नियमों के तहत तैयार किए जाते हैं, इसलिए उन पर अलग से हलाल प्रमाणन लागू करने का औचित्य स्पष्ट नहीं है।
मुजफ्फर नगर के ज्वाइंट हिंदू मोर्चा के कन्वीनर नरेंद्र पवार ने इस मुद्दे को सनातन परंपराओं का अपमान बताते हुए उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि गाय और उससे प्राप्त होने वाले उत्पाद भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखते हैं। ऐसे में डेयरी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर उत्पन्न विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से एक विशेषज्ञ समिति गठित कर पूरे मामले की समीक्षा कराने की मांग की।
नासिक में पुरोहित महासंघ के अध्यक्ष सतीश शुक्ला ने कहा कि गोकुल ब्रांड दूध और डेयरी उत्पादों के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम रहा है और देशभर में इसकी पहचान है। उन्होंने कहा कि यदि विदेशी बाजारों में विस्तार के लिए कंपनी ने हलाल सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है तो उसे इस संबंध में उपभोक्ताओं के सामने स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए। उनका मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल और गोकुल की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए इस विषय ने लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया है।
इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए नासिक के संत नागा तुलसीदास जी महाराज ने कहा कि दूध, दही और घी को भारतीय परंपरा में शुद्ध और पवित्र उत्पाद माना जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे उत्पादों के लिए अलग से हलाल सर्टिफिकेशन की आवश्यकता क्यों है। यदि कंपनी ने यह प्रमाणन लिया है तो उसे इसके उद्देश्य और आवश्यकता को स्पष्ट करना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
--आईएएनएस
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