हड़जोड़: अस्थि रोग की वजह से बढ़ गई है परेशानी? यह पौधा दिलाएगा आराम
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। किचन गार्डन आज की जीवनशैली का प्रमुख हिस्सा बन गया है और छोटी मात्रा में घर में ऐसे पौधे लगाने का चलन बढ़ गया है, जो ऑक्सीजन देने से लेकर सेहत का ख्याल रखें। ऐसा ही एक पौधा है हड़जोड़, जिसे उगने में कम जगह चाहिए।
ये पौधा घास की तरह फैल जाता है लेकिन उसके औषधीय गुण किसी को भी हैरान कर देंगे।
हड़जोड़ का सबसे बड़ा गुण है हड्डियों को जोड़ना। नाम की तरह यह पौधा हड्डियों को संपूर्ण पोषण देता है। आयुर्वेद की दुर्लभ जड़ी-बूटियों में हड़जोड़ का इस्तेमाल अस्थि रोगों से लिए पुराने समय से किया जा रहा है। जिसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूती देता है। इसके अलावा, हड़जोड़ का इस्तेमाल जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है। खास बात ये है कि हड़जोड़ की सिर्फ पत्ती ही नहीं, तना और जड़ भी औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
हड़जोड़ का प्रयोग अस्थमा और श्वसन से जुड़ी परेशानियों में भी किया जाता है। अगर मौसम बदलने की वजह से या किसी पुरानी बीमारी की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है, तो हड़जोड़ लाभकारी साबित होता है। हड़जोड़ के पत्तों की भाप लेने और चिकित्सक की सलाह लेकर इस्तेमाल करने से राहत मिलती है। वहीं, अगर मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द महसूस होता है या फिर खेलकूद से लगी चोट या मोच आ गई है, तो ऐसे में हड़जोड़ अच्छे से रिकवरी करने में मदद करता है। इसके लिए हड़जोड़ के पत्ते को सेंककर प्रभावित जगह पर लगाया जाता है।
जोड़ों के दर्द की समस्या इन दिनों आम है। किसी को कमर में दर्द है, तो किसी को अधिक काम की वजह से कंधों में दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हड़जोड़ का प्रयोग अस्थि से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है और सूजन को भी कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही अगर पेट की परेशानियों की वजह से खाना पचने में दिक्कत होती है या कब्ज की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तब भी हड़जोड़ का इस्तेमाल किया जाता है।
इसके लिए बाजार में आसानी से हड़जोड़ का चूर्ण मिल जाता है, जिसका सेवन चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है। हड़जोड़ के सेवन में कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी हैं। गर्भवती महिला, हृदय रोगियों, गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों या फिर छोटे बच्चों को हड़जोड़ का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
--आईएएनएस
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