ज्ञानेश कुमार को हटाए बिना लोगों को अधिकार नहीं मिलेंगे : हुसैन दलवई
मुंबई, 27 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम करने के तरीके को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू का यह स्वीकार करना कि उनके मतभेद थे, इस बात को सिद्ध करता है कि आयोग के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अमित शाह और पीएम मोदी के इशारे पर काम कर रहा है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है और इसे तुरंत बदलना चाहिए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, "ज्ञानेश कुमार कहीं न कहीं खुद को बहुत बड़ा समझते हैं। चुनाव आयोग 3 लोगों का कमीशन है और तीनों को बराबर अधिकार हैं, लेकिन वह दोनों को साइडलाइन करके रखते हैं। दोनों सदस्यों- विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि हमारे मतभेद थे, वो मिट गए। मतलब मतभेद थे, ये तो सिद्ध हो गया न। मतभेद क्या है? जिस तरह से काम करते हैं- अमित शाह बोलते हैं, पीएम मोदी बोलते हैं, वैसे ही काम करते हैं। ये बिल्कुल गलत है, इसे बदलना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाने के बाद ही इस देश में लोगों को उनके अधिकार मिलेंगे। यह लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है, इस पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को खराब करने का काम हो रहा है, जो बिल्कुल गलत है। इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो रहा है, यह अच्छी बात है। बीजेपी के भी कुछ लोग इससे नाराज हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों को चुनाव आयोग को बदनाम करने की जरूरत नहीं है। आयोग ने खुद ही अपनी साख खराब की है। संबित पात्रा जो कह रहे हैं, वह ठीक है, वह भाजपा की लाइन होगी। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या इस देश के लोकतंत्र को खत्म करना भाजपा की लाइन है? आप इस देश में संविधान की लाइन पर चलते हैं या आरएसएस की लाइन पर, यह जरा स्पष्ट कीजिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा को जो चाहिए, वह मिल रहा है। कई जगह गलत तरीके से चुनाव होने की वजह से भाजपा आज सत्ता में बैठी है। यह देश पाकिस्तान जैसा होता जा रहा है। यह महात्मा गांधी का देश है, पंडित जवाहरलाल नेहरू का देश है और यह देश बनाने में पटेल साहब का योगदान है।
हुसैन दलवई ने कहा कि हिंदुस्तान-पाकिस्तान बंटवारे के बाद बाबा साहब अंबेडकर के दिए हुए संविधान के मुताबिक देश चलता है। यह देश इस तरह नहीं चलना चाहिए। पहले से ही उनकी ऐसी मंशा थी। उनके दिमाग में इस देश का झंडा भी नहीं था, वे तिरंगे का भी विरोध करते थे और वे इस देश के संविधान का भी विरोध करते थे। उनका साफ कहना था कि संविधान क्या है, उन्हें पता ही नहीं। उन्हें मनुवादी विचारों वाला संविधान चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस ने आठ लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट देकर सरकारी गवाह बना दिया है। इसका मतलब यह है कि जो मुख्य आरोपी है, जो चोरी करने वाला या चोरी करवाने वाला है, उसे किनारे कर दिया गया है। छोटे लोगों को आरोपी बनाया गया है, इससे कुछ निकलेगा नहीं। उन्होंने कहा कि देखिए, ये धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और धर्म में भी चोरी करने लगे हैं। इनका कैरेक्टर क्या है, यह साफ हो गया है।
--आईएएनएस
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