‘ज्ञानेश कुमार के रहते निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं’, सपा नेता फखरुल हसन चांद का बयान
लखनऊ, 27 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन पर समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर करने का प्रयास किया है। चुनाव आयोग के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग एक-दूसरे के सहयोगी बन गए हैं।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान फखरुल हसन चांद ने कहा कि हमारे अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले कहा कि सुप्रीम कोर्ट को ही चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर करने का प्रयास किया है। चुनाव आयोग की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला था, जिसको भाजपा ने पलटने का काम किया, वही लागू होना चाहिए। राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष भी अपनी बात रख रहा है।
चुनाव आयोग की अहम बैठक पर उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि चुनाव आयोग के लिए मुख्य मुद्दा क्या है? अब तो यह भी बड़ा सवाल है। जिस तरह से बड़ी संख्या में एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम काटे गए, बंगाल का मामला तो बिल्कुल आश्चर्यजनक और चकित करने वाला है, जहां इतनी बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम काट दिए गए और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वे नाम जोड़े गए। फॉर्म 6 का मामला हो, चुनाव में धांधली का मामला हो या पारदर्शी तरीके से चुनाव का मामला हो, समाजवादी पार्टी ने तो 18 हजार से ज्यादा एफिडेविट दिए थे, उन पर क्या हुआ? चुनाव आयोग पर कोई भरोसा नहीं रह गया है। ज्ञानेश कुमार पर कोई भरोसा नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है। सब जगह जो एसआईआर हुआ, उसको लेकर बड़े सवाल हैं। चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर बड़े सवाल हैं। इसलिए अखिलेश यादव ने कहा कि इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान सुप्रीम कोर्ट को लेना चाहिए। जहां तक दिल्ली एसआईआर का सवाल है, समाजवादी पार्टी समझती है कि एसआईआर की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए।
भारत निर्वाचन आयोग की शनिवार को हुई अहम बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस पर उन्होंने कहा कि जब कोई खुलासा होता है, जब कोई पर्दाफाश होता है, तो भारतीय जनता पार्टी एक्सरसाइज करती नजर आती है। चुनाव आयोग बड़ी-बड़ी बैठकें और बड़े-बड़े बयान देता नजर आता है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर चुनाव आयोग की वही भूमिका होती है और उस पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष पर कभी कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आता, लेकिन जहां विपक्ष की सरकारें हैं, वहां बड़ी संख्या में अधिकारियों के ट्रांसफर होते हैं। ज्ञानेश कुमार के रहते चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं हो सकता। उनकी नियुक्ति जिस तरह से हुई है, पूरा प्रोसेस जिस तरह का है, उस पर बड़े सवाल हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं को न सिर्फ नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि उन्हें कमजोर भी कर रही है। समाजवादी पार्टी समझती है कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को दबाव में बना रखा है। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी की मर्जी की नियुक्ति है। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हुई, भाजपा की मर्जी से हुई, इसलिए उनसे निष्पक्ष चुनाव या निष्पक्ष रहने की उम्मीद करना बेइमानी होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की सीजेपी की मांग और आंदोलन शुरू करने की बात पर उन्होंने कहा कि देश में गुस्सा है। देश की जनता में गुस्सा है। चुनाव जिस तरह से धांधली से हो रहे हैं, जिस तरह से ज्ञानेश कुमार की भूमिका है, समाजवादी पार्टी समझती है कि चाहे नौजवान हों, चाहे आम जनता हो, सब सवाल उठा रहे हैं कि वोट किसको देते हैं और सरकार किसकी बनती है। यह किसी एक राज्य की स्थिति नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को पुलिस की चार्जशीट पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाई है। एसआईटी की रिपोर्ट आ जाए, वह सार्वजनिक हो जाए। सुप्रीम कोर्ट देखेगा कि कौन लोग दोषी थे और कौन लोग दोषी नहीं हैं, क्योंकि इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी बनाई थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट को भरोसा नहीं था। जब सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं था, तो समाजवादी पार्टी को इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है और न ही पुलिस की चार्जशीट पर कोई टिप्पणी करनी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एसआईटी की रिपोर्ट आ जाए, फिर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
वहीं, अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग और सरकार एक साथ आ गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि चुनाव आयोग कितना निष्पक्ष रह गया है। ये निष्पक्ष नहीं रह गए, बल्कि एक-दूसरे के सहयोगी बन गए हैं। सरकार चुनाव आयोग का सहयोग कर रही है और चुनाव आयोग सरकार की मदद कर रहा है। इसी तरह सरकारें बन रही हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक चुनाव आयोग की पैरवी और समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, आखिर इसकी क्या जरूरत आ गई है? इससे पता चलता है कि उनका भरोसा जनता पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर है। चुनाव आयोग के बल पर ये सरकार बनाना चाहते हैं। सीएम योगी भी चुनाव आयोग का समर्थन कर रहे हैं। इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है, बल्कि 2027 में अखिलेश यादव की सरकार बनने वाली है।
--आईएएनएस
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