गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले पर सीएम मान और सुखबीर बादल ने दीं शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित अन्य नेताओं ने गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले के मौके पर सभी संगत को हार्दिक बुधाई दी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रथम पातशाह गुरु नानक देवके पवित्र चरणों से पवित्र हुई पवित्र जगह 'गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब' के सालाना मेले के मौके पर सभी संगत को हार्दिक बधाई।"
इसके साथ ही उन्होंने भगत कबीर के पवित्र जन्मदिवस पर पूरी संगत को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा, "महान आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक समानता के संदेशवाहक, भगत कबीर के पवित्र जन्मदिवस पर पूरी संगत को हार्दिक बधाई।"
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रथम पातशाह गुरु नानक देव के पवित्र चरणों के स्पर्श से पवित्र हुई पवित्र भूमि, गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले के मौके पर सभी संगत को हार्दिक बधाई।"
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने लिखा, "पहले शासक, धन्य गुरु नानक देव की पवित्र याद को समर्पित गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब में लगने वाले सालाना मेले पर पूरी संगत को दिल से बधाई। इस पवित्र जगह पर गुरु साहिब ने दिव्य प्रवचन दिए थे और गुरु के शब्दों से कड़वे रीठे के फल भी मीठे हो गए थे। यह पवित्र कहानी हमें सिखाती है कि गुरु साहिब की शरण में जाने से कठोर दिल की कड़वाहट भी धुल जाती है। आइए, इस पवित्र मौके पर गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।"
बता दें कि गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत जिले में लधिया और रतिया नदियों के संगम पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक सिख तीर्थस्थल है। 1501 ईस्वी में अपनी यात्रा के दौरान, गुरु नानक देव जी ने यहां नाथ योगियों के साथ आध्यात्मिक चर्चा की थी।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां रुकने पर गुरु नानक देव ने अपने शिष्य भाई मरदाना की भूख मिटाने के लिए कड़वे रीठे (साबुन) के पेड़ के फलों को चमत्कारिक रूप से मीठा बना दिया था। आज भी इस गुरुद्वारे में तीर्थयात्रियों को 'रीठे का रस' मीठे प्रसाद के रूप में दिया जाता है। गुरुद्वारे से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक बगीचा है जिसे 'नानक बगीची' कहा जाता है, जहां इन रीठों के पेड़ उगाए जाते हैं और प्रसाद के लिए फल यहीं से लाए जाते हैं। हर साल वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर यहां एक बहुत बड़ा धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है।
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