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गुप्त नवरात्रि 2026 : जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, मां काली को जरूर लगाएं यह भोग

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। भगवती के आराधना का बेहद महत्वपूर्ण पर्व गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रहा है। विधि-विधान से की गई देवी की आराधना से आध्यात्मिक उन्नति, मनोकामना पूर्ति के साथ ही नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और शक्ति का संचार होता है।
गुप्त नवरात्रि 2026 : जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, मां काली को जरूर लगाएं यह भोग

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। भगवती के आराधना का बेहद महत्वपूर्ण पर्व गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रहा है। विधि-विधान से की गई देवी की आराधना से आध्यात्मिक उन्नति, मनोकामना पूर्ति के साथ ही नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और शक्ति का संचार होता है।

19 जनवरी, सोमवार से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो 27 जनवरी तक चलेगी। यह वर्ष की चार नवरात्रियों में से एक 'गुप्त' नवरात्रि है, जिसमें विशेष रूप से तांत्रिक साधना, दस महाविद्याओं की उपासना और गहन आध्यात्मिक उन्नति के लिए भगवती की आराधना की जाती है। शारदीय या चैत्र नवरात्रि की भांति यह उत्सव धूम-धाम से नहीं, बल्कि शांत, गुप्त और नियमबद्ध तरीके से मनाया जाता है। भक्त घटस्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की साधना करते हैं, जिसमें सिद्धि प्राप्ति, बाधा निवारण और मनोकामना पूर्ति का विशेष महत्व है।

इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 2 बजकर 14 मिनट से 20 जनवरी तक रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार 19 जनवरी से पूजा आरंभ होती है। सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग इसे और भी फलदायी बनाता है। दृक पंचांग के अनुसार, घटस्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय का निर्धारण करना जरूरी है। नवरात्रि का प्रथम अनुष्ठान घटस्थापना (कलश स्थापना) है, जो देवी शक्ति के आह्वान का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि पर दोपहर 12 बजे से पहले अवश्य पूरी कर लेनी चाहिए। अमावस्या या रात्रि काल में यह वर्जित है।

दृक पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में किया कोई भी पूजा -पाठ फलदायी होता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 11 बजकर 52 मिनट तक उसके बाद श्रवण रहेगा। चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे। वहीं, सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 49 मिनट पर होगा। घटस्थापना के लिए उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जो 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक है। यदि कलश स्थापना ब्रह्म मुहूर्त में नहीं कर सके तो अभिजित सर्वोत्तम विकल्प है। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 11 बजकर 52 मिनट से अगले दिन बजकर 7 बजकर 14 मिनट तक है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार, चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग से बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि ये पूर्णतः निषिद्ध नहीं हैं। वहीं, राहुकाल सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक है। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य न करें।

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा की जाती है। यह तांत्रिक और गुप्त साधना का विशेष समय होता है, जहां दस महाविद्याओं की आराधना शुरू होती है। मां काली को दस महाविद्याओं में प्रथम स्थान प्राप्त है। उनकी पूजा से शनिदोष, साढ़ेसाती, भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। विधि विधान से पूजन के पश्चात देवी को गुड़ का भोग लगाना चाहिए। साथ ही लाल फूल, सिंदूर, धूप-दीप और काले तिल, इत्र का भी चढ़ाना चाहिए।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

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