Samachar Nama
×

गुजरात : उज्ज्वला योजना से महिलाओं के जीवन में आया बदलाव, धुएं से मुक्ति और स्वास्थ्य में सुधार

गुजरात : उज्ज्वला योजना से महिलाओं के जीवन में आया बदलाव, धुएं से मुक्ति और स्वास्थ्य में सुधार
गुजरात : उज्ज्वला योजना से महिलाओं के जीवन में आया बदलाव, धुएं से मुक्ति और स्वास्थ्य में सुधार

बनासकांठा, 29 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' से गुजरात के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। योजना के तहत मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर मिलने से लाखों महिलाओं को रसोई के धुएं से राहत मिली है। महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, समय की बचत हुई है और स्वच्छ ईंधन के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।

गुजरात के बनासकांठा जिले की अमीरगढ़ तालुका के घांटा गांव में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला है। कभी इस गांव की महिलाएं लकड़ी के चूल्हे पर धुएं के बीच खाना पकाने को मजबूर थीं। उन्हें खाना बनाने के लिए जंगलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से लकड़ियां इकट्ठा करनी पड़ती थीं। बारिश के मौसम में गीली लकड़ियों के कारण खाना बनाना ज्यादा मुश्किल हो जाता था। लेकिन, उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने के बाद अब गांव की महिलाएं एलपीजी चूल्हे पर आसानी से खाना बना रही हैं और धुएं से होने वाली परेशानियों से मुक्त हो गई हैं।

घांटा गांव की लाभार्थी मीनाबेन डामोर ने बताया कि गैस सिलेंडर मिलने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पहले उन्हें लकड़ियां लानी पड़ती थीं और चूल्हे के धुएं से आंखों में जलन होती थी। अब गैस पर खाना बनाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। सरकार की इस योजना से उन्हें काफी लाभ हुआ है और अब रसोई का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।

योजना की एक अन्य लाभार्थी मनीषाबेन सागिया ने भी सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब सरकार की ओर से गैस सिलेंडर मिल गया है। पहले बरसात के दिनों में गीली लकड़ियों के कारण खाना बनाना बेहद कठिन हो जाता था, लेकिन अब गैस पर आसानी से भोजन तैयार हो जाता है। उज्ज्वला योजना के तहत सरकार की ओर से गैस सिलेंडर पर सब्सिडी भी मिलती है, जिससे आर्थिक राहत भी मिल रही है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का प्रभाव केवल रसोई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डाला है।

बनासकांठा के चिकित्सक डॉ. अंतिक केला ने बताया कि पहले महिलाओं में सांस से जुड़ी बीमारियां जैसे सीओपीडी और अस्थमा काफी सामान्य थीं। मरीजों की ट्रीटमेंट-हिस्ट्री लेने पर पता चलता था कि वे वर्षों तक चूल्हे पर खाना बनाती रही थीं, जिसके कारण उनके शरीर में कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें पहुंचती थीं। अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कारण अधिकांश घरों में चूल्हे की आवश्यकता समाप्त हो गई है और इसी वजह से महिलाओं में सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में काफी कमी देखने को मिली है।

योजना के प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए बनासकांठा के जिला आपूर्ति अधिकारी भव्य निनामा ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लगभग दो लाख एलपीजी कनेक्शन सक्रिय हैं। इन लाभार्थियों को अब तक करीब छह करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है। इस योजना के कारण लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और उनके जीवन में सुख-सुविधाओं की बढ़ोतरी हुई है।

बता दें कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के दस वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में देशभर में 10 करोड़ 50 लाख से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। गुजरात में भी करीब 44 लाख से अधिक गरीब महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

Share this story

Tags