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गुजरात पुलिस की डायल 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉस सर्विस लोगों के लिए बनी संजीवनी

गुजरात पुलिस की डायल 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉस सर्विस लोगों के लिए बनी संजीवनी
गुजरात पुलिस की डायल 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉस सर्विस लोगों के लिए बनी संजीवनी

अहमदाबाद, 23 जुलाई (आईएएनएस)। 'नंबर एक आपातकालीन सेवाएं अनेक मंत्र' के साथ गुजरात पुलिस की डायल 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉस सर्विस राज्य के लोगों के लिए संजीवनी बन गई है।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पिछले साल डायल 112 जन रक्षक आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा की शुरुआत की थी। इसके तहत एडवांस्ड सॉफ्टवेयर से चलने वाले जीपीएस युक्त वाहनों के जरिए 'न्यू-एज स्मार्ट पुलिसिंग' की दिशा में कदम उठाए गए थे। यानी अब किसी भी आपातकालीन स्थिति में यदि कोई नागरिक इमरजेंसी नंबर '112' डॉयल करता है तो उसे मिनटों में पुलिस, फायर, एंबुलेंस और महिला व चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद मिलती है।

अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने कहा कि गुजरात सरकार ने 112 नंबर की सुविधा शुरू की है। पहले लोगों को इमरजेंसी के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने पड़ते थे। पुलिस के लिए पहले 100 नंबर, जरूरत पड़ने पर हेल्थ के लिए 108 नंबर, फायर के लिए अलग नंबर और इमरजेंसी सर्विस के लिए अलग नंबर थे, लेकिन अब सभी सेवाएं 112 नंबर पर उपलब्ध हैं।

112 नंबर डायल करने पर पुलिस के कॉल सेंटर के जरिए निकटतम जन रक्षक टीम को संदेश दिया जाता है और टीम पुलिस स्टेशन की सीमा की परवाह किए बिना पीड़ित की सहायता के लिए पहुंच जाती है। इससे पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम में खासी कमी आई है और 7 से 8 मिनट के भीतर पीड़ित तक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

लाभार्थी नवनीत पटेल ने कहा कि कुछ समय पहले मेरे घर के पास एक दीवार गिर गई और उसमें मेरे दो-तीन रिश्तेदार फंस गए थे। उस समय हमने 112 नंबर डायल किया था और थोड़ी ही देर में 112 जन रक्षक टीम आ गई थी। फायर ब्रिगेड भी वहां थी और 108 सर्विस भी थी और उन्होंने तुरंत हमें इलाज दिलाने में मदद की।

ईएमआरआई - जीएचएस (इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट - ग्रीन हेल्थ सर्विसेज) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जसवंत प्रजापति ने कहा कि हम यह भी अपील करते हैं कि अगर कोई इमरजेंसी दिखे तो बिना सोचे-समझे तुरंत 112 नंबर डायल करें। साथ ही यह भी आग्रह है कि यह नंबर तभी डायल करें जब बहुत जरूरी हो ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो और कोई जरूरतमंद को इस वजह से सर्विस से दूर न रहना पड़े।

गुजरात में 1 सितंबर, 2025 से 16 जुलाई, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 112 इमरजेंसी सर्विस पर पुलिस से जुड़ी 9,90,130 कॉल रिसीव की गई हैं। इनमें से पुलिस केस से जुड़ी 8,76,810 शिकायतें थीं, जबकि मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ी 56,551 कॉल, अग्निशमन से जुड़ी 17,977 कॉल, महिला सुरक्षा से संबंधित 37,929 शिकायतें, चाइल्ड सिक्योरिटी से जुड़ीं 659 कॉल और आपदा से संबंधित घटनाओं के बारे में 204 शिकायतें थीं। सबसे अहम बात यह है कि लगभग 45 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण जन रक्षक टीम ने मौके पर ही कर दिया।

पुलिस की नागरिकों से अपील है कि मुश्किल समय में बेझिझक इमरजेंसी नंबर 112 जरूर डायल करें।

अहमदाबाद की डीसीपी रीमा मुंशी ने कहा कि किसी भी सीनियर सिटीजन महिला बच्चे या किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को जब भी मदद की जरूरत हो तो बस 112 नंबर डायल करें। एक जन रक्षक वाहन आपकी सेवा में तुरंत पहुंच जाएगा।

जाहिर है कि आपात परिस्थितियों में अलग-अलग विभागों के नंबर याद रखना और उन्हें डायल कर मदद मांगना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन गुजरात पुलिस की 112 जन रक्षक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सर्विस ने इस मुश्किल को बेहद आसान बना दिया है। डायल 112 सर्विस के जरिए गुजरात पुलिस 24 घंटे नागरिकों की सेवा के लिए तत्पर रहते हुए स्मार्ट पुलिसिंग का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही है।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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