गुजरात पुलिस की 'ऑपरेशन सेफ साइबर स्पेस', महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड के प्रति कर रही जागरूक
गांधीनगर, 29 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य में ‘ऑपरेशन सेफ साइबर स्पेस’ अभियान चलाया।
1 जुलाई से 28 जुलाई तक चलाए गए इस अभियान में पुलिस की शी-टीम और साइबर सेल के कर्मचारियों ने महिलाओं और बच्चों को सेक्स्टॉर्शन और फाइनेंशियल फ्रॉड से लेकर डीपफेक जैसे ऑनलाइन खतरों के बारे में जागरूक किया। इसके जरिए बच्चों को बताया गया कि वे इंटरनेट का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करें।
गांधीनगर की छात्रा हिना मकवाना ने कहा कि साइबर क्राइम पर एक प्रोग्राम था, जिसमें सौरभ सर और दूसरी मैडम आईं, और उन्होंने हमें साइबर सुरक्षा के बारे में, अभयम के बारे में, और महिला हेल्पलाइन के बारे में बहुत अच्छी जानकारी दी, जो भविष्य में हमारे काम आ सकती है।
छात्रा किंजल परमार ने कहा कि साइबर क्राइम दो तरह के होते हैं, एक है फाइनेंशियल साइबर क्राइम और दूसरा है सोशल मीडिया के जरिए होने वाला साइबर अपराध, इसमें फाइनेंशियल साइबर क्राइम को ओटीपी और वेब लिंक भेजकर किया जाता है। हमें बताया गया कि इन वेब लिंक पर क्लिक नहीं करना है और ओटीपी किसी को शेयर नहीं करना है और इसकी शिकायत 1930 नंबर पर पुलिस से करनी है।
गुजरात पुलिस के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता, टेक्नोलॉजी-आधारित मॉनिटरिंग, पीड़ितों तक पहुंच, साइबर जागरूकता और त्वरित कानूनी कार्रवाई द्वारा साइबर क्राइम्स की रोकथाम करना है। 'ऑपरेशन सेफ साइबर स्पेस' के दौरान बच्चों को ये भी बताया गया कि किसी परेशानी में फंसने पर वे किस प्रकार पुलिस से संपर्क करें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
शी-टीम की कॉन्सटेबल बिनल जगदीशचंद्र ने कहा कि हम स्कूलों में जाकर सेमिनार करते हैं और बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में बताते हैं। हम बच्चों के मन से पुलिस का डर निकालने की कोशिश करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि पुलिस आपकी दोस्त है। अगर आपको किसी भी तरह की कोई दिक्कत है, तो आप पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।
अभियान के पहले दो सप्ताह में गुजरात पुलिस द्वारा पूरे राज्य में 5,000 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पहले सप्ताह के दौरान साइबर लिटरेसी और जागरूकता से जुड़े 1,874 कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं, दूसरे सप्ताह में सेक्सटॉर्शन, डीपफेक और साइबर स्टॉकिंग जैसे गंभीर ऑनलाइन खतरों से जुड़े 3,415 विशेष सत्र आयोजित किए गए।
अजय कुमार चौधरी, एडीजीपी, महिला सेल एवं सीआईडी क्राइम, गुजरात पुलिस ने कहा कि फेक प्रोफाइल, डिजिटल ब्लैकमेलिंग, साइबर रिवेंज जैसी बहुत सारी घटनाएं अब आम हो गई हैं। आजकल बहुत से लोग 8 घंटे से भी ज्यादा समय मोबाइल पर बिताते हैं। ऐसे में उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और वे कैसे खुद को धोखाधड़ी से बचा सकते हैं, इस पर जागरूकता फैलाने के लिए पुलिस द्वारा पूरे राज्य में एक विशेष ड्राइव चलाया जा रहा है।
इन जनजागरूकता शिविरों के माध्यम से पुलिस ने न केवल लाखों नागरिकों से सीधे संपर्क स्थापित किया है, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं को साइबर फ्रॉड के बारे में विस्तार से बताया है। इसके साथ ही जनभागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न जिलों में साइबर रैलियां और गोष्ठियां आयोजित कर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में भी जानकारी दी गई।
जाहिर है कि आज के डिजिटल युग में लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में पता होना बहुत जरूरी है और गुजरात पुलिस का ‘ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस’ अभियान इस दिशा में कारगर साबित हुआ है।
--आईएएनएस
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