गुजरात का नेचुरल खेती की तरफ ऐतिहासिक कदम, गुजकोमासोल ने पूरे राज्य में नेचुरल खाद का डिस्ट्रीब्यूशन शुरू किया
गांधीनगर, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल के तहत गुजकोमासोल ने नेचुरल मिनरल आधारित खाद और कृषि उत्पादों का राज्यभर में वितरण और प्रचार शुरू कर दिया है। इस पहल की आधिकारिक घोषणा गांधीनगर टाउन हॉल में आयोजित किसान सेमिनार-कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए किसान, कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता से मुक्त कर प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर प्रोत्साहित करना है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक रूप से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी मिलेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया और इस नई पहल के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस परियोजना को जॉर्डन की प्रतिष्ठित कंपनी मानसिर नेचुरल ग्रीन (एमएनजी) के सहयोग से लागू किया गया है, जो प्राकृतिक खनिजों से तैयार उर्वरक और कृषि उत्पादों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित हैं और पूरी तरह रसायन मुक्त होने के कारण मिट्टी और फसलों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों का परीक्षण आनंद एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में किया गया। वैज्ञानिक परीक्षणों में यह सामने आया कि ये प्राकृतिक उर्वरक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन बढ़ाने में प्रभावी हैं। सकारात्मक परिणामों के आधार पर इन्हें पूरे राज्य में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इफको और गुजकोमासोल के चेयरमैन दिलीपभाई संघानी ने कहा कि आज केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात के किसान इस पहल को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
इस दौरान बिपिनभाई पटेल ने किसानों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि इन प्राकृतिक उत्पादों से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव होगा और मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी। वहीं लखनऊ से आए पद्मश्री रामशरण शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्राकृतिक खेती के फायदों पर प्रकाश डाला और किसानों को धीरे-धीरे रासायनिक खेती से दूर होने की सलाह दी।
कार्यक्रम में इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल और मार्केटिंग निदेशक योगेश कुमार सहित कई अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सहकारी तंत्र के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
सेमिनार में उपस्थित किसानों ने इस पहल को लेकर उत्साह दिखाया और उत्पादों के उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
--आईएएनएस
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