Samachar Nama
×

गुजरात के दो प्रमुख कृषि उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान, ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग

गुजरात के दो प्रमुख कृषि उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान, ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग
गुजरात के दो प्रमुख कृषि उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान, ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग

गांधीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को साकार करते हुए और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात अपने पारंपरिक कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

इसी क्रम में उत्तर गुजरात के प्रसिद्ध मसाला उत्पाद ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) रजिस्ट्री द्वारा प्रतिष्ठित जीआई टैग प्रदान किया गया है। इसके साथ ही दोनों उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अपनी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और आधिकारिक ब्रांड के रूप में स्थापित होंगे।

गुजरात की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन के अनुरूप ऊंझा के जीरा और सौंफ को मिला जीआई टैग ‘गांव से ग्लोबल’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल एक सरकारी प्रमाणन नहीं है, बल्कि हमारे किसानों की अथक मेहनत, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन, व्यापारियों के विश्वास और ऊंझा की समृद्ध कृषि परंपरा का सम्मान है। इससे दोनों उत्पादों को विश्व बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी, वे अपनी अलग ब्रांड के रूप में स्थापित होंगे और गुजरात के कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई मजबूती मिलेगी।"

जीआई टैग ऐसे उत्पादों को प्रदान किया जाता है, जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा अथवा विशेषताएं किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती हैं। यह टैग वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। जीआई टैग संबंधित उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है, निर्धारित गुणवत्ता मानकों की रक्षा करता है तथा नकली उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जीआई टैग मिलने के बाद ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ दोनों प्रमाणित भौगोलिक ब्रांड के रूप में स्थापित होंगे। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा बेहतर मूल्य और निर्यात की संभावनाएं मजबूत होंगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, जीआई टैग प्राप्त उत्पाद सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक बाजार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। इस उपलब्धि में खेतीवाड़ी उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी), ऊंझा, भारत सरकार, गुजरात सरकार के बागायत एवं किसान कल्याण विभाग, सरदार कृषि नगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू) तथा भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), गुजरात सहित विभिन्न संस्थाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और विभिन्न संस्थाओं के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस विशेष उपलब्धि पर ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के चेयरमैन दिनेश पटेल ने कहा, “ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग ऊंझा के किसानों और मसाला व्यापार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे दोनों उत्पादों की प्रामाणिकता और बाजार विश्वसनीयता को नई मजबूती मिलेगी। वैश्विक स्तर पर इनकी मांग और स्वीकार्यता बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।”

वर्तमान में भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री में 400 से अधिक उत्पाद पंजीकृत हैं, जिनमें गुजरात के गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू जैसे विशिष्ट कृषि उत्पादों शामिल हैं। अब ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ के भी इस सूची में शामिल होने से गुजरात के जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों की श्रृंखला और सशक्त हुई है। इससे राज्य के कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को नई मजबूती मिलने के साथ किसानों के लिए बेहतर बाजार, मूल्य संवर्धन और निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

Share this story

Tags