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सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज बिक्री पर लगा बैन गुजरात हाईकोर्ट ने हटाया, सरकार की रोक लगाने की मांग भी खारिज

सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज बिक्री पर लगा बैन गुजरात हाईकोर्ट ने हटाया, सरकार की रोक लगाने की मांग भी खारिज

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज खाना बनाने और बेचने पर लगाए गए प्रतिबंध को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस फैसले पर रोक लगाने की राज्य सरकार की मांग भी खारिज कर दी। फिलहाल, मंदिर के आसपास नॉनवेज की बिक्री पर लगाया गया नया प्रतिबंध प्रभावी नहीं रहेगा।

जस्टिस निशा एम. ठाकोर की पीठ ने कहा कि संबंधित कलेक्टर ने गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 33(1)(w) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वैध कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की सीमा पार की। अदालत के मुताबिक, इस प्रावधान के आधार पर वैध व्यापार पर इस तरह की रोक लगाना उचित नहीं था।राज्य सरकार इस फैसले को डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। हालांकि, फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार प्रतिबंध रद्द है।

अगस्त 2026 में सरकार ने लगाया था प्रतिबंध

गुजरात सरकार ने अगस्त 2026 में नोटिफिकेशन जारी कर सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और मंदिर तक पहुंचने वाले छह प्रमुख रास्तों पर नॉनवेज खाना बनाने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया था।

इस आदेश के खिलाफ सोमनाथ के सात रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वे पिछले 20 से 25 साल से लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं, लेकिन नए आदेश के बाद उन्हें नॉनवेज बेचना बंद करने के लिए मजबूर किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एक व्यापारी को पुलिस चौकी ले जाकर भविष्य में नॉनवेज नहीं बेचने का लिखित आश्वासन देने के लिए कहा गया। व्यापारियों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिले कारोबार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया।

गुजरात सरकार ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सोमनाथ केवल एक सामान्य बाजार नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। सरकार के मुताबिक, नौ महीनों में करीब 1.16 करोड़ श्रद्धालु यहां पहुंचे थे।

सरकार ने हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इस तरह के प्रतिबंध लागू हैं।

सरकार का यह भी कहना था कि दुकानों को बंद नहीं कराया जा रहा, बल्कि कारोबारी नॉनवेज के बजाय शाकाहारी भोजन बेच सकते हैं। इसके अलावा, सोमनाथ जिले के गठन, मंदिर परिसर के विकास और कॉरिडोर परियोजना के बाद आसपास के क्षेत्र का विस्तार होने के कारण प्रतिबंध का दायरा बढ़ाना जरूरी था।

व्यापारियों ने कहा- धीरे-धीरे पूरे शहर को वेज जोन बनाया जा रहा

याचिकाकर्ताओं ने सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पुराने आदेशों में लगातार नए इलाके और सड़कें जोड़ी जा रही हैं। उनके मुताबिक, बिना किसी नए ठोस कारण के प्रतिबंध का दायरा बढ़ाकर धीरे-धीरे पूरे सोमनाथ शहर को शाकाहारी क्षेत्र बनाने की कोशिश की जा रही है।

व्यापारियों का कहना था कि लंबे समय से लाइसेंस के आधार पर चल रहे कारोबार पर इस तरह की रोक उनके अधिकारों को प्रभावित करती है।

सोमनाथ में नॉनवेज प्रतिबंध की पूरी टाइमलाइन

2006: पहली बार लगा था प्रतिबंध

उस समय गिर-सोमनाथ जिला अस्तित्व में नहीं आया था। पुलिस ने सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और मंदिर से बस स्टैंड तक जाने वाली सड़क पर अंडे, मांस और मछली की बिक्री तथा भंडारण पर रोक लगाने का आदेश दिया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस आदेश को अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी।

2018: प्रतिबंध का दायरा बढ़ाया गया

वेरावल-पाटण संयुक्त नगरपालिका ने सोमनाथ की कुछ प्रमुख सड़कों को शाकाहारी क्षेत्र घोषित करने का फैसला किया। सात मौजूदा याचिकाकर्ताओं में से तीन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, उस समय कोई अंतरिम रोक नहीं लगी और मामला लंबित रहा।

2019: नए रास्ते भी प्रतिबंध में शामिल

2018 के आदेश के तहत तय किए गए क्षेत्र में कुछ और सड़कें जोड़ी गईं। इस आदेश को भी अदालत में चुनौती नहीं दिए जाने की जानकारी दी गई है।

2026: प्रतिबंध का दायरा फिर बढ़ाया गया

राज्य सरकार ने 2019 के आदेश की जगह नया नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें तीन नए रास्तों और क्षेत्रों को शामिल किया गया। इनमें त्रिवेणी संगम और भालका तीर्थ की ओर जाने वाले रास्तों के साथ सोमनाथ कॉरिडोर परियोजना के बाद बने नए सर्कल भी शामिल थे।

फिलहाल क्या होगा?

गुजरात हाईकोर्ट के फैसले से अगस्त 2026 में लगाए गए नए प्रतिबंध को राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार की आदेश पर रोक लगाने की मांग भी स्वीकार नहीं की। अब सरकार फैसले को उच्चतर अदालत में चुनौती देने का विकल्प अपना सकती है।हालांकि, प्रतिबंध से जुड़े पुराने आदेशों की स्थिति और अलग-अलग क्षेत्रों में लागू नियमों पर इस फैसले का क्या असर पड़ेगा, यह संबंधित आदेशों और आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

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