गुजरात: पारंपरिक खेती से आगे बढ़े डांग के जिग्नेश भोए, सब्सिडी से स्ट्रॉबेरी खेती कर लाखों कमाए
डांग (गुजरात), 3 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात के आदिवासी बहुल डांग जिले में एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई मिसाल कायम की है। दसवीं तक पढ़ाई करने वाले जिग्नेश भोए ने पुश्तैनी खेती के साथ स्ट्रॉबेरी की आधुनिक खेती अपनाई और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अतिरिक्त आमदनी शुरू की।
डांग जिला पहाड़ों से घिरा हुआ है, जहां वर्षों से नागली, ज्वार, वरई और धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती होती रही है, लेकिन बदलते समय के साथ यहां के किसान आधुनिक बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। सुदूर गांव मोटामालूंगा में रहने वाले जिग्नेश भोए ने पारंपरिक खेती से होने वाली सीमित आय से असंतुष्ट होकर कुछ नया करने का फैसला किया। उन्होंने स्थानीय बागवानी विभाग से संपर्क किया, सरकारी सब्सिडी योजनाओं की जानकारी ली और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। अब उनकी सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी अब इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
पिछले चार-पांच वर्षों से जिग्नेश स्ट्रॉबेरी, टमाटर और सफेद मूसली की आधुनिक पद्धति से खेती कर रहे हैं। शुरुआत में छोटे स्तर पर कुछ गुठ्ठों में प्रयोग किया, लेकिन आज उन्होंने दो एकड़ भूमि पर करीब 40 हजार पौधे लगा दिए हैं। इससे उन्हें इस सीजन में 20 से 25 लाख रुपए तक की आय होने की उम्मीद है।
स्ट्रॉबेरी के पौधे वे महाबलेश्वर से मंगवाते हैं और मार्केटिंग के लिए उपज आहवा और सापुतारा के स्थानीय बाजारों के अलावा अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत और राजकोट के थोक बाजारों में भेजते हैं।
डांग के बागवानी अधिकारी तुषार गामित ने आईएएनएस को बताया कि जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार पौधों पर 75 प्रतिशत, मल्चिंग पेपर पर 75 प्रतिशत और ड्रिप इरिगेशन पर भी 75 प्रतिशत सब्सिडी देती है। विभाग ने जिग्नेश को प्लांटिंग मटेरियल, तकनीकी मार्गदर्शन और सब्सिडी प्रदान की है। उन्होंने कहा, "डांग में कई किसान अब स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। जिग्नेश की सफलता अन्य आदिवासी युवाओं के लिए प्रेरणा है।"
जिग्नेश भोए ने कहा, "पहले मैं गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाला इकलौता व्यक्ति था, लेकिन अब मेरे साथ चार और किसान जुड़ चुके हैं। इससे हमारे गांव में करीब 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है। पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तरीके अपनाने से जीवन में बड़ा बदलाव आया है। सरकार की सब्सिडी और प्रशिक्षण ने हमें आत्मनिर्भर बनाया।"
डांग जिला प्राकृतिक खेती के लिए जाना जाता है। यहां के आदिवासी किसान सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर नकदी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।
--आईएएनएस
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