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गुजरात : सीएम भूपेंद्र पटेल को सौंपी गई प्रशासनिक सुधार आयोग की छठी रिपोर्ट

गांधीनगर, 3 दिसंबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को गुजरात में साकार करने का दृष्टिकोण अपनाया है। पीएम मोदी का विचार युवाओं को उचित मौके तथा रोजगार के अवसर देकर उनकी असीम शक्ति को विकसित राष्ट्र-विकसित राज्य के निर्माण में जोड़ने का है, जिसे पटेल राज्य में आगे बढ़ा रहे हैं।
गुजरात : सीएम भूपेंद्र पटेल को सौंपी गई प्रशासनिक सुधार आयोग की छठी रिपोर्ट

गांधीनगर, 3 दिसंबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को गुजरात में साकार करने का दृष्टिकोण अपनाया है। पीएम मोदी का विचार युवाओं को उचित मौके तथा रोजगार के अवसर देकर उनकी असीम शक्ति को विकसित राष्ट्र-विकसित राज्य के निर्माण में जोड़ने का है, जिसे पटेल राज्य में आगे बढ़ा रहे हैं।

सीएम भूपेंद्र पटेल ने इस उद्देश्य से राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे और कार्य पद्धति में आवश्यक फेरबदल के लिए मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. हसमुख अढिया की अध्यक्षता में गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) का गठन किया है।

इस प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अढिया ने बुधवार को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी छठी सिफारिश रिपोर्ट सौंपी। जीएआरसी इससे पहले तक राज्य सरकार को पांच रिपोर्ट सौंप चुका है।

मुख्यमंत्री को बुधवार को सौंपी गई जीएआरसी की छठी रिपोर्ट में राज्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी, टेक्नोलॉजी से युक्त तथा युवा केन्द्रित बनाने की लगभग 9 सिफारिशें की गई हैं।

जीएआरसी की इस छठी रिपोर्ट में जिन मुद्दों को शामिल किया गया है, उनके अनुसार

1- भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए निश्चित टाइमलाइन- जिस भर्ती प्रक्रिया में तीन स्टेज हों, वह 9 से 12 महीने में और जिसमें दो स्टेज हों, वह 6 से 9 महीने में पूरी करने और भविष्य में इस समयावधि से भी कम समय में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो; ऐसी सिफारिश की गई है।

2- संयुक्त भर्ती तथा कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी)- रिपोर्ट में समान शैक्षणिक योग्यता वाले विभिन्न कैडरों के लिए संयुक्त प्रिलिम्स तथा विषयवार मेन्स परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता लाने की सिफारिश की गई है। इससे समान प्रकार के कैडर के लिए अलग-अलग परीक्षा पर होने वाले प्रशासनिक एवं वित्तीय खर्च में काफी कमी लाकर भर्ती प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी।

3- हर दो वर्ष में दो निश्चित रिक्विजिशन विंडो- हर दो वर्ष में दो निश्चित रिक्विजिशन विंडो निर्धारित कर सभी विभागों द्वारा ऑनलाइन मांग पत्र सबमिट करने की व्यवस्था के साथ भर्ती नियमों, परीक्षा नियमों और प्रशिक्षण नियमों के लिए एक केंद्रीय सेल का गठन करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके फलस्वरूप, भर्ती प्रक्रिया के लिए आवश्यक नियमों को बहुत तेजी से अंतिम रूप दिया जा सकेगा और भर्ती प्रक्रिया तेज बनेगी।

4- संपूर्ण डिजिटल डॉक्यूमेंट वेयरीफिकेशन (आईएएसएस)- रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि हाल में होने वाली मैनुअल जांच के स्थान पर संपूर्ण डिजिटल दस्तावेज से जांच करने से तथा डिजी-लॉकर की तरह ही एपीआई-लिंक्ड डेटाबेस और यूनिक उम्मीदवार डॉक्यूमेंट रजिस्ट्री के गठन से भर्ती करने वाली संस्था और सरकारी विभागों के बीच उम्मीदवारों के दस्तावेज आसानी से भेजे जा सकेंगे और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी बहुत प्रभावशाली बनेगा।

5- कैंडिडेट फ्रेंडली-एंड टु एंड डैशबोर्ड- रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि उम्मीदवार आधारित यूनिक आईडी पर एंड टु एंड डैशबोर्ड बनाया जाए, जिसमें आवेदन से लेकर नियुक्ति तक की समग्र प्रक्रिया को ट्रैक किए जाने सकने की व्यवस्था के साथ जिलेवार पोस्टिंग के लिए डिजिटल माध्यम से जिला चयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

6- रिक्विजिशन से नियुक्ति तक संपूर्ण डिजिटल वर्कफ्लो- एकीकृत डिजिटल पोर्टल द्वारा सभी स्टेकहोल्डर्स (विभागों-एजेंसियों-उम्मीदवारों) के बीच सूचना का आदान-प्रदान संभव होगा और उम्मीदवारों को एक ही प्रकार के दस्तावेज बार-बार अलग-अलग भर्ती संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं रहेगी। ऐसी व्यवस्था से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण के साथ एकरूपता की सिफारिश की गई है।

7-भर्ती एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि तथा पुनर्गठन-स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अधीनस्थ विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों की भर्ती के लिए नए मेडिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड (एमएसआरबी) का गठन करने और जीएसएसएसबी, जीपीएसएसबी तथा जीपीआरबी को गुजरात लोक सेवा आयोग के समक्ष आवश्यक व आर्थिक स्वायत्तता देने की सिफारिश इस रिपोर्ट में हुई है।

8- कम्प्यूटर बेस्ड परीक्षाओं का व्यापक उपयोग- राज्य में जहां तक संभव हो, परीक्षाएं कम्प्यूटर आधारित (कम्प्यूटर बेस्ड) ली जाएं और ऐसी परीक्षा की प्रभावी देखरेख के लिए हर भर्ती एजेंसी में एक अलग एग्जाम मॉनिटरिंग यूनिट (ईएमयू) की स्थापना की जाए। यह भी सुझाव रिपोर्ट में दिया गया है।

9- 10 वर्ष का भर्ती कैलेंडर- हर विभाग के लिए भावी आवश्यकताओं पर आधारित 10 वर्ष के भर्ती कैलेंडर की समीक्षा कर बहुत ही महत्वपूर्ण इमरजेंसी सर्विस तथा क्रिटिकल कैडर की पहचान कर हर संभव तेजी से भर्ती करने की सिफारिश जीएआरसी ने की है।

देश के विकास में अग्रसर गुजरात के युवाओं को तेजी से अधिक एवं प्रभावी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के संकल्प को इन सिफारिशों से पूरा किया जा सकेगा।

इतना ही नहीं, जीएआरसी द्वारा की गई ये सिफारिशें लागू करने से भर्ती प्रक्रिया एक वर्ष से कम समयसीमा में पूर्ण हो सके, राज्य के युवाओं को समय पर तथा पारदर्शी रोजगार के अवसर प्राप्त हों, लंबे समय से लंबित रिक्तियाँ तेजी से भरी जाए और सरकार की प्रशासनिक क्षमता एवं सार्वजनिक सेवा प्रदान करने में गति आए; ऐसा राज्य सरकार का दृष्टिकोण साकार होगा।

मुख्यमंत्री को जीएआरसी की यह छठी रिपोर्ट सौंपे जाने के अवसर पर मुख्य सचिव एमके. दास, मुख्यमंत्री के सलाहकार एसएस. राठौड़, मुख्यमंत्री की अपर प्रधान सचिव अवंतिका सिंह, प्रशासनिक सुधार प्रभाग के प्रधान सचिव हारित शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. विक्रांत पांडे और जीएआरसी के अधिकारी उपस्थित रहे।

--आईएएनएस

एसके/एएस

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