ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में किसानों को राहत, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे समेत सात अहम प्रस्तावों पर मुहर
ग्रेटर नोएडा, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में किसानों, औद्योगिक क्षेत्रों, युवाओं और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बुधवार को हुई बैठक में आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों को अधिग्रहण के समान सुविधाएं देने, वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने, आबादी भूखंड आवंटन की पात्रता में बदलाव और लीज बैक के मामलों में राहत देने समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा लिंक रोड से विस्थापित किसानों के पुनर्वास, युवाओं के कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र, नए पुलिस थाने और बिजलीघर के उच्चीकरण से संबंधित प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया।
बोर्ड बैठक में किसानों के हित में लिए गए प्रमुख निर्णय के तहत आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों को भी भूमि अधिग्रहण के समान सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है। इसके तहत 5725 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से भूमि देने का विकल्प चुनने वाले भू-स्वामियों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ दिया जाएगा। वहीं, 6415 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर का विकल्प चुनने वाले किसानों को यह लाभ नहीं मिलेगा।
प्राधिकरण ने 27 अगस्त 2026 की बोर्ड बैठक में भूमि खरीद के लिए ये दोनों विकल्प निर्धारित किए थे। अब इस व्यवस्था के तहत 27 अगस्त के बाद होने वाली भूमि खरीद की प्रक्रिया में किसानों को निर्धारित विकल्प के अनुसार लाभ दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों और अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के बीच सुविधाओं में समानता सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित उन 533 किसानों को भी 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने का निर्णय लिया गया है, जिन्हें अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है।
प्राधिकरण ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की सहमति के बाद बोर्ड ने भी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे लंबे समय से अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब ग्रेटर नोएडा के प्रभावित किसानों को भी नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तर्ज पर अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ मिल सकेगा। किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने आबादी भूखंड आवंटन की पात्रता संबंधी नियमों में भी बदलाव किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत किसान के परिवार में पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी के साथ सास-ससुर को भी पात्रता के दायरे में शामिल किया जाएगा।
दरअसल, कुछ मामलों में भूमि अर्जन की कार्रवाई से पहले किसान अपनी जमीन पुत्रवधू के नाम हस्तांतरित कर देते थे। प्राधिकरण की पुरानी नीति के कारण ऐसे मामलों में पुत्रवधू आबादी भूखंड के लाभ से वंचित रह जाती थीं। अब नियमों में संशोधन से ऐसे पात्र परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए किसान का अधिसूचित क्षेत्र का मूल निवासी होना और संबंधित भूमि का राजस्व अभिलेखों में निर्धारित शर्तों के अनुसार दर्ज होना आवश्यक रहेगा। ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में आ रही कानूनी और वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए भी प्राधिकरण ने पहल की है।
बोर्ड ने लीज बैक के लिए जमा की जाने वाली प्रतिकर राशि पर ब्याज माफी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर किसानों को ब्याज देना पड़ता है। तीन महीने से अधिक देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज लगने का प्रावधान है, जबकि एक वर्ष के भीतर भुगतान नहीं होने पर पट्टा निरस्त भी किया जा सकता है। किसानों की मांग पर अब ब्याज माफी के लिए शासन से अनुमति मांगी जाएगी। इसके अतिरिक्त लीज बैक के मामलों में किसानों के हिस्से का निर्धारण कर उनके पक्ष में लीज डीड जारी करने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गई है।
यह प्रक्रिया शासनादेश 24 अप्रैल 2010 तथा ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली 2011 और इसके संशोधित प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी। गाजियाबाद में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर फैक्ट्री से एनएच-24, वर्तमान एनएच-9, तक लिंक रोड निर्माण से प्रभावित किसानों के पुनर्वास का रास्ता भी साफ हुआ है। प्राधिकरण बोर्ड ने ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी में उपलब्ध 5.48 एकड़ भूमि पर पात्र किसानों के भूखंडों की लीज डीड कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
खास बात यह है कि लीज डीड पर होने वाला खर्च भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा। इस प्रक्रिया का लाभ उन मूल किसानों को मिलेगा, जिनकी जमीन सड़क निर्माण की जद में आई थी और जिनके नाम संबंधित राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद गठित समिति ने 17 जून 2026 की बैठक में पात्र किसानों के दस्तावेज प्राप्त कर सत्यापन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संस्तुति की थी। अब संबंधित किसानों को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से जारी आवंटन पत्र की मूल प्रति और नक्शा-11 की सत्यापित प्रति अथवा किसान द्वारा खरीदे गए खसरे की बैनामे की मूल प्रति उपलब्ध करानी होगी। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद लीज डीड की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ग्रेटर नोएडा में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए सेक्टर ईकोटेक-1 स्थित औद्योगिक भूखंड संख्या-01 में 32,880 वर्गमीटर यानी करीब आठ एकड़ जमीन चिह्नित कर आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। भूमि का निशुल्क आवंटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग की सहमति के बाद किया जाएगा। इस केंद्र में तकनीकी और गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के युवाओं को उद्योगों और सेवा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ भाषा प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सेल, कार्यालय और प्रशिक्षणार्थियों के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करना है।
औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ग्राम कासना में पुलिस थाना स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। इसके लिए सेक्टर ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में 3957 वर्गमीटर जमीन निशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय, गौतमबुद्ध नगर की ओर से पुलिस स्टेशन के लिए जमीन की मांग की गई थी। इसके बाद प्राधिकरण के परियोजना विभाग ने संबंधित भूखंड चिह्नित कर पुलिस विभाग को लीज प्लान उपलब्ध कराया। पुलिस विभाग ने 31 जुलाई 2025 को लीज डीड कराने के लिए सहमति देते हुए अनुरोध किया था।
अब नि:शुल्क आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। नए थाने से क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों, कर्मचारियों, उद्यमियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षा संबंधी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ईकोटेक-10 स्थित मौजूदा 132/33 केवी जीआईएस विद्युत उपकेंद्र को 220/33 केवी जीआईएस उपकेंद्र में उच्चीकृत करने की तैयारी है। इस परियोजना पर निर्माण और जमीन की लागत सहित करीब 226 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। बोर्ड ने इस परियोजना से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
उच्चीकरण के लिए 8945 वर्गमीटर जमीन उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इससे ईकोटेक-10, ईकोटेक-11, घंघोला, मायचा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तथा गांवों की भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
--आईएएनएस
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