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ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण जा रहे किसान लिए गए हिरासत में

ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण जा रहे किसान लिए गए हिरासत में
ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण जा रहे किसान लिए गए हिरासत में

ग्रेटर नोएडा, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। किसानों ने यमुना प्राधिकरण कार्यालय पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण महापड़ाव देने की चेतावनी दी थी। इसके मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

किसानों के मुताबिक, पुलिस ने तीन दर्जन से अधिक किसानों को हिरासत में लेकर बसों के माध्यम से वहां से हटाया। इस कार्रवाई के बाद किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। किसान संगठनों ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर प्राधिकरण कार्यालय की ओर जा रहे थे।

किसान संगठनों का कहना है कि वे गांधीवादी तरीके से अपनी बात प्रशासन और प्राधिकरण के सामने रखना चाहते थे। हालांकि, किसानों के अनुसार, उन्हें प्राधिकरण तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया और पुलिस ने हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति की ओर से जारी बयान में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया।

संगठन का यह भी आरोप है कि घटनास्थल पर वीडियो बना रहे युवाओं के मोबाइल फोन छीने गए तथा बुजुर्ग किसानों पर लाठियां चलाई गईं। किसान संगठनों ने प्रदर्शन का समर्थन कर रहे अधिवक्ताओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, कुछ अधिवक्ताओं को कई पुलिसकर्मियों ने घेरकर पीटा। संगठन ने कहा कि किसानों की मांगों पर बातचीत करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

किसानों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उनका समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। किसानों की प्रमुख मांगों में अधिग्रहित जमीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिया जाना, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान और किसानों की आबादी से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण शामिल है।

किसान संगठनों का कहना है कि इन मांगों को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। उनका आरोप है कि प्राधिकरण और प्रशासन को किसानों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का निस्तारण करना चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार आंदोलन करने के लिए मजबूर न होना पड़े। पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन ने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराए जाने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है।

इसके अलावा, कथित रूप से घायल किसानों और अधिवक्ताओं के उपचार की व्यवस्था करने तथा उन्हें मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है। संगठन ने यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) से तत्काल किसानों के साथ वार्ता करने की मांग की है। साथ ही हिरासत में लिए गए सभी किसानों को तत्काल रिहा करने की अपील की गई है।

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए किसान, मजदूर, खाप पंचायतों, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि किसानों की मांगों का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान होना चाहिए। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, अतिरिक्त मुआवजे और विकसित प्लॉट जैसी मांगें लंबे समय से किसानों के आंदोलनों का प्रमुख मुद्दा रही हैं।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी

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