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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट रणनीतिक बढ़त के लिए जरूरी, विपक्ष राजनीति से ऊपर उठकर करें समर्थन: मेजर जनरल भाटिया

गुरुग्राम, 1 मई (आईएएनएस)। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अरविंद भाटिया ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व और 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने इस दौरान वनों के सीमित उपयोग, प्रस्तावित कंटेनर टर्मिनल और विदेशी शिपिंग पर निर्भरता में कमी जैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला और राष्ट्रीय महत्व की इन परियोजनाओं के लिए सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट रणनीतिक बढ़त के लिए जरूरी, विपक्ष राजनीति से ऊपर उठकर करें समर्थन: मेजर जनरल भाटिया

गुरुग्राम, 1 मई (आईएएनएस)। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अरविंद भाटिया ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व और 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने इस दौरान वनों के सीमित उपयोग, प्रस्तावित कंटेनर टर्मिनल और विदेशी शिपिंग पर निर्भरता में कमी जैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला और राष्ट्रीय महत्व की इन परियोजनाओं के लिए सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की।

अरविंद भाटिया ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहते हैं कि इसके तहत स्थानीय आबादी के लिए एक नया शहर बसाया जाएगा। सबसे पहले, एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट कंटेनर टर्मिनल बनाया जाएगा। एक ग्रीनफील्ड हवाई क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसका उपयोग नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, वहां सैन्य संपतियां, नौसेना के ठिकाने और वायुसेना के ठिकाने भी स्थापित किए जाएंगे। 2018 के बाद इसका महत्व और भी बढ़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वीपों की व्यापक मैपिंग का निर्देश दिया और नौसेना को विस्तृत सर्वेक्षण का काम सौंपा।

आपको याद होगा कि रॉस द्वीप का नाम बदलकर सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा गया था, जबकि हैवलॉक और नील द्वीपों का नाम बदलकर स्वराज और शहीद रखा गया था। ऐतिहासिक रूप से, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नेताजी ने भी यहां एक ठिकाना बनाया था। इस क्षेत्र के महत्व और इसके बुनियादी ढांचे के विकास पर वर्तमान सरकार ने जोर दिया है।

उन्‍होंने बताया कि अंडमान और निकोबार 836 द्वीपों का एक समूह है। ​यह भारत की मुख्य भूमि (मेनलैंड) से लगभग 1200-1300 किमी दूर है। ​यह म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों के अधिक करीब है। ​कुल 836 द्वीपों में से केवल 38 द्वीप वर्तमान में बसे हुए हैं और कुल जनसंख्या लगभग 3.5 लाख है। ​​यह परियोजना ग्रेट निकोबार द्वीप के पूर्वी हिस्से में विकसित की जाएगी।

भाटिया के मुताबिक, परियोजना के लिए केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा, जबकि 82 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से अछूता रहेगा। यहां एक 'इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट टर्मिनल' बनाया जाएगा, जिसकी क्षमता 1.62 एमयू टीईयू होगी।

उन्‍होंने कहा, “इसमें चीन मुख्य कारक है। अगर प्रशांत महासागर से किसी जहाज को हिंद महासागर में प्रवेश करना है, तो वह सुंडा जलडमरूमध्य, लोम्बोक जलडमरूमध्य या मलक्का जलडमरूमध्य से होकर आता है, जो इनमें सबसे बड़ा है। अगर हमारी स्थिति इसके करीब होगी तो हमारे जहाज, निगरानी प्रणालियां, तटरक्षक बल और नौसेना बल ज्‍यादा प्रभावी ढंग से काम कर पाएंगे। एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल और एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनने से, लड़ाकू विमान भी यहां से उड़ान भर पाएंगे और फिर से तैनात हो पाएंगे।

यह इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव, मौजूदगी और व्यापार पर नजर रखने के लिए एक बहुत बड़ा कदम है और इसलिए चीन की ओर से इसका विरोध होगा। अगर विपक्ष इस तरह से विरोध कर रहा है, तो कहीं न कहीं यह सवाल भी पूछा जाएगा कि क्या हमारी विपक्षी पार्टियां चीन का खेल तो नहीं खेल रहीं? राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे मुद्दों पर एकता होनी चाहिए और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर मेजर जनरल (रिटायर्ड) अरविंद भाटिया कहते हैं कि इसका रणनीतिक महत्व बहुत ज्‍यादा है, इसके बड़े सैन्य निहितार्थ हैं और समुद्री क्षेत्र में इसकी भूमिका बहुत अहम है।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति का निर्माण करेगा, जिसमें लगभग इतनी क्षमता वाला एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भी शामिल होगा। 1.62 मिलियन टीईयू, इसे सबसे बड़े पोर्ट्स में से एक बनाता है। अभी भारत की लगभग 75 प्रतिशत कंटेनर हैंडलिंग विदेशी पोर्ट्स पर निर्भर है और यह प्रोजेक्ट इस निर्भरता को काफी कम कर देगा। इसका घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर बड़ा असर पड़ेगा। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, और इसका विरोध राजनीतिक फायदे या वाहवाही लूटने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

अरविंद भाटिया ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के संबंध में राहुल गांधी की टिप्पणियों पर कहते हैं, “जब भी इस तरह की राष्ट्रीय या रणनीतिक संपत्तियां विकसित की जाती हैं तो विपक्ष को सरकार का समर्थन करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सिर्फ इसलिए कि यह सरकार की पहल है, इसका विरोध किया जाए। राफेल सौदे, गलवान घाटी संघर्ष और सैन्य मामलों से संबंधित टिप्पणियों जैसे मुद्दों पर, राजनीतिक कारणों से सवाल उठाए गए हैं। इस तरह के सवाल सिर्फ वाहवाही लूटने के लिए नहीं पूछे जाने चाहिए। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और ग्रेट निकोबार द्वीप विकास जैसे प्रोजेक्ट्स पर, विपक्ष को विरोध करने के बजाय पूरा समर्थन देना चाहिए।

भाटिया ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर कहते हैं, “होर्मुज जलडमरूमध्य ने दुनिया को दिखा दिया है कि समुद्री चोकपॉइंट्स कितने महत्वपूर्ण हो गए हैं। अगर आप ग्रेट निकोबार द्वीप को देखें, तो यह मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 100 किलोमीटर दूर है, जो होर्मुज की तरह ही एक बहुत ही महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जिससे होकर लगभग 30 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है। चीन के व्यापार का भी एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर भारत यहां अपनी सैन्य, नौसैनिक और निगरानी उपस्थिति को मजबूत करता है, तो इससे समुद्री क्षेत्र में उसकी क्षमता बढ़ेगी और इस चोकपॉइंट पर उसका बेहतर नियंत्रण होगा। इसलिए मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास इस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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