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चलते ई-रिक्शा को रोकने वाले 3 मोबाइल ऐप पर सरकार की सख्ती, ऐप स्टोर से हटाने के आदेश; चालकों को मिल सकती है राहत

चलते ई-रिक्शा को रोकने वाले 3 मोबाइल ऐप पर सरकार की सख्ती, ऐप स्टोर से हटाने के आदेश; चालकों को मिल सकती है राहत

दिल्ली समेत देश के कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी का कारण बने तीन मोबाइल ऐप्स के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी मंत्रालय) ने BAT BMS, Lossigy और EPOCH Li-ion नाम के तीन ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। हालांकि, खबर लिखे जाने तक ये ऐप्स कुछ प्लेटफॉर्म, विशेषकर प्ले स्टोर पर उपलब्ध बताए जा रहे हैं।

हाल के दिनों में कई शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ लोग इन ऐप्स का इस्तेमाल कर ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट हो जाते थे। इसके बाद वे बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद कर देते थे। इससे चालकों को बीच रास्ते में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था और कई बार यातायात भी प्रभावित होता था।

कैसे काम करता था पूरा तरीका?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ई-रिक्शा में लगी लीथियम-आयन बैटरियों का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ब्लूटूथ के माध्यम से संचालित होता है। कई मामलों में इस सिस्टम पर या तो पासवर्ड नहीं था या सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। ऐसे में कोई भी व्यक्ति संबंधित मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी सेटिंग्स तक पहुंच सकता था और बैटरी को बंद करने जैसे कमांड भेज सकता था।

इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर कुछ शरारती तत्व चलते हुए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर रोक देते थे। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें अचानक ई-रिक्शा बंद होने के बाद चालक परेशान नजर आए।

सरकार ने क्यों उठाया कदम?

आईटी मंत्रालय को लगातार मिल रही शिकायतों और वायरल वीडियो के बाद मामले का संज्ञान लिया गया। जांच के बाद मंत्रालय ने संबंधित ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश जारी किए, ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके और ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।हालांकि, ऐप्स के पूरी तरह हटने की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। इसलिए फिलहाल यह देखा जाना बाकी है कि विभिन्न ऐप स्टोर इन निर्देशों का पालन कब तक करते हैं।

कारों पर क्यों नहीं होता ऐसा खतरा?

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि कारों में इस्तेमाल होने वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम कहीं अधिक सुरक्षित होते हैं। इनमें मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण (Authentication) और अन्य साइबर सुरक्षा उपाय लागू होते हैं। यही वजह है कि कोई सामान्य मोबाइल ऐप बिना अधिकृत अनुमति के कार की बैटरी या अन्य सिस्टम से कनेक्ट नहीं हो सकता।इसके विपरीत, कम लागत वाले कुछ ई-रिक्शा बैटरी सिस्टम में पर्याप्त साइबर सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए थे, जिससे यह तकनीकी खामी सामने आई।

सुरक्षा मानकों पर बढ़ेगा जोर

इस पूरे मामले के बाद ई-रिक्शा उद्योग में बैटरी सुरक्षा और साइबर प्रोटेक्शन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बैटरी निर्माताओं और ई-रिक्शा कंपनियों को ऐसे BMS विकसित करने होंगे, जिनमें मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ब्लूटूथ प्रोटोकॉल का इस्तेमाल हो। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के लिए बैटरी सिस्टम तक पहुंचना संभव नहीं होगा और ई-रिक्शा चालकों को इस तरह की परेशानियों से राहत मिलेगी।

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