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डीजल निर्यात शुल्क में कटौती, सरकार ने 25.5 से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर किया

डीजल निर्यात शुल्क में कटौती, सरकार ने 25.5 से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर किया

पेट्रोल और डीजल से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगाए जाने वाले शुल्क में कटौती कर दी है। डीजल निर्यात शुल्क को 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर अब 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दर लागू होने के बाद तेल कंपनियों और निर्यात कारोबार से जुड़े कारोबारियों पर शुल्क का बोझ कुछ कम होगा।

डीजल निर्यात पर शुल्क में यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार की स्थिति का सीधा असर भारत के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात और तेल कंपनियों के कारोबार पर पड़ता है।

निर्यात शुल्क में कमी का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना भी हो सकता है। शुल्क कम होने से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के स्तर पर बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, डीजल निर्यात शुल्क में कटौती का घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर पड़ना जरूरी नहीं है। घरेलू ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, विदेशी मुद्रा विनिमय दर, कर और तेल कंपनियों की कीमत नीति शामिल हैं।

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। ऐसे में निर्यात शुल्क में बदलाव का असर मुख्य रूप से निर्यात कारोबार और तेल कंपनियों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से डीजल निर्यात शुल्क में 1.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इससे निर्यातकों और संबंधित कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोलियम बाजार में आगे होने वाले बदलावों पर कंपनियों और उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।

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