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विदेशी दबाव के आरोपों पर सरकार की सफाई, वीडियो में कहा- फैसला वापस लेने का सवाल ही नहीं

विदेशी दबाव के आरोपों पर सरकार की सफाई, वीडियो में कहा- फैसला वापस लेने का सवाल ही नहीं

 

UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बड़ा स्पष्टीकरण दिया। मंत्रालय ने साफ कहा कि UPI से जुड़े नियमों में बदलाव किसी विदेशी दबाव में नहीं किया गया है। सरकार के मुताबिक डिजिटल पेमेंट सिस्टम से संबंधित सभी फैसले भारत की घरेलू जरूरतों और नीतिगत प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक UPI के नए शुल्क ढांचे को वापस लेने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है। नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाना है। यह शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि संबंधित कारोबारी लेनदेन पर लागू होगा। वहीं 2,000 रुपये तक के UPI मर्चेंट पेमेंट और आम ग्राहक से ग्राहक के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखा गया है।

राहुल गांधी ने उठाए सवाल

UPI शुल्क के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि UPI से जुड़े नए फैसले का फायदा अमेरिका को हो सकता है। राहुल गांधी ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।

सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UPI से संबंधित नीतिगत फैसले भारत की अपनी जरूरतों और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लिए गए हैं। वित्त मंत्रालय ने विदेशी प्रभाव या दबाव की बात को गलत बताया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

UPI पर शुल्क लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। इस मुद्दे को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें नए शुल्क संबंधी व्यवस्था को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में UPI भुगतान व्यवस्था पर शुल्क लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है।

आम ग्राहकों पर क्या असर होगा

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आम ग्राहकों को UPI भुगतान करने पर सीधे कोई शुल्क नहीं देना होगा। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि नए ढांचे का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है, जबकि छोटे व्यापारियों और आम उपयोगकर्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना है।

इस पूरे विवाद में अब सरकार की सफाई, विपक्ष के आरोप और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आगे होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि UPI से जुड़े नए शुल्क ढांचे को वापस लेने की उसकी कोई योजना नहीं है।

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