Gonda Custodial Death: हिरासत में मौत के मामले में RPF के दो जवानों को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका ठुकराई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गोंडा में 35 वर्षीय संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत के मामले में आरोपी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने दोनों की याचिकाएं खारिज करते हुए हिरासत में मौत की घटनाओं को लेकर गंभीर टिप्पणी भी की।
न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने RPF के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई की। दोनों ने गोंडा के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) द्वारा 4 अगस्त को उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
चोरी की जांच में सामने आया था सोनकर का नाम
मामला गोंडा के किंकी गांव निवासी संजय कुमार सोनकर की कथित हिरासत में मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 28 सितंबर 2025 को गोंडा से गुवाहाटी जा रही एक मालगाड़ी से मोतीगंज रेलवे स्टेशन क्षेत्र में सरसों के तेल के छह डिब्बे चोरी हो गए थे। मामले की जांच के दौरान RPF को सोनकर के बारे में जानकारी मिली थी।
आरोप है कि 4 नवंबर 2025 को RPF के जवान सोनकर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। उसी शाम करीब साढ़े चार बजे उसे जांच के सिलसिले में उसके गांव भी लाया गया था। इसके बाद जवान उसे वापस अपने साथ ले गए।
अगले दिन परिवार को मिली मौत की जानकारी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अगले दिन सोनकर के भाई को जानकारी दी गई कि उसके भाई का शव मुर्दाघर में रखा हुआ है। आरोप लगाया गया कि हिरासत के दौरान सोनकर के साथ मारपीट की गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
वहीं, आरोपी RPF कर्मचारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनके वकीलों ने अदालत में दलील दी कि दोनों को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी दिया गया हवाला
आरोपी पक्ष की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि रिपोर्ट में जांघ के ऊपरी हिस्से पर चोट और दोनों घुटनों पर खरोंच का उल्लेख है। वकीलों ने तर्क दिया कि इस तरह की चोटों से मौत होने की संभावना नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस दलील पर कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें अभियोजन के आरोपों का समर्थन करती हैं या नहीं, इसका फैसला मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
हिरासत में मौत को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी
अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर चिंता जताई। पीठ ने टिप्पणी की कि कोविड-19 महामारी का दौर समाप्त हो चुका है, लेकिन हिरासत में मौत की समस्या कम होती हुई नहीं दिख रही है।
अदालत ने यह भी कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में पुलिसकर्मियों को अपने आचरण से जुड़े आरोपों का खंडन करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मामले में आरोपी RPF कर्मियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं इसी के साथ खारिज कर दी गईं।

