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सोना या चांदी, 1 लाख रुपए के निवेश पर 1, 3 और 5 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानिए पूरा हिसाब

सोना या चांदी, 1 लाख रुपए के निवेश पर 1, 3 और 5 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानिए पूरा हिसाब
सोना या चांदी, 1 लाख रुपए के निवेश पर 1, 3 और 5 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानिए पूरा हिसाब

नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय परिवारों में सोना और चांदी लंबे समय से निवेश और संपत्ति सुरक्षित रखने के प्रमुख साधन रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दोनों धातुओं का प्रदर्शन अलग-अलग रहा है। जहां हाल के वर्षों में चांदी ने तेज रफ्तार दिखाई है, वहीं लंबी अवधि में सोना भी मजबूत रिटर्न देने में सफल रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि यदि कुछ साल पहले सोना या चांदी खरीदी होती तो आज कितना फायदा होता।

उद्योग संगठन आईबीजेए के 999 शुद्धता वाले सोना और चांदी के बेंचमार्क भावों के आधार पर देखें तो पिछले एक वर्ष में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि किसी निवेशक ने एक साल पहले चांदी में 1 लाख रुपए लगाए होते, तो उसकी राशि बढ़कर लगभग 1.18 लाख रुपए हो जाती। वहीं सोने में लगाया गया 1 लाख रुपए का निवेश करीब 1.14 लाख रुपए का होता।

तीन वर्षों की अवधि में चांदी का प्रदर्शन और अधिक प्रभावशाली रहा है। इस दौरान चांदी ने करीब 149.29 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यानी तीन साल पहले निवेश किए गए 1 लाख रुपए बढ़कर करीब 2.49 लाख रुपए हो गए होते। दूसरी ओर सोने ने इसी अवधि में 125.26 प्रतिशत का रिटर्न दिया और 1 लाख रुपए का निवेश बढ़कर करीब 2.25 लाख रुपए पहुंच गया।

हालांकि पांच साल के आंकड़ों में तस्वीर थोड़ी बदल जाती है। लंबी अवधि में सोने ने चांदी को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। पांच साल पहले सोने में लगाए गए 1 लाख रुपए बढ़कर करीब 2.88 लाख रुपए हो गए होते, जबकि चांदी में किया गया समान निवेश लगभग 2.79 लाख रुपए तक पहुंचता। यानी अल्पकाल और मध्यम अवधि में चांदी बेहतर रही, लेकिन लंबी अवधि में सोने ने बढ़त बनाई रखी।

विशेषज्ञों के मुताबिक सोना और चांदी दोनों की कीमतें कुछ सामान्य कारकों जैसे डॉलर की चाल, ब्याज दरों, वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग से प्रभावित होती हैं। हालांकि चांदी की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसका उपयोग निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में बढ़ती मांग के कारण कई बार चांदी की कीमतें सोने की तुलना में अधिक तेजी दिखाती हैं। दूसरी ओर यही कारण इसे अधिक अस्थिर भी बनाता है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि सोना आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है और आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान निवेशकों का भरोसा इसकी ओर बढ़ जाता है। वहीं चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, इसलिए इसमें मुनाफे की संभावना अधिक होने के साथ जोखिम भी ज्यादा रहता है।

विशेषज्ञाें के अनुसार, ये आंकड़े केवल बेंचमार्क कीमतों पर आधारित हैं। वास्तविक निवेश में सोना और चांदी खरीदते समय 3 प्रतिशत जीएसटी, ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज और बिक्री के समय शुद्धता तथा डीलर मार्जिन जैसे कारकों का भी असर पड़ता है। जो निवेशक फिजिकल मेटल रखने से बचना चाहते हैं, वे गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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