ब्रिक्स 2026 में डिक्लेरेशन के लिए सभी देशों को राजी करना भारत की सबसे बड़ी सफलता: चिंतन रिसर्च फाउंडेशन में फेलो इंद्राणी तालुकदार
मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स 2026 में दिल्ली डिक्लेरेशन के लिए सभी सदस्य देशों को राजी करना भारत की अध्यक्षता की सबसे बड़ी सफलता है। यह बयान चिंतन रिसर्च फाउंडेशन में फेलो इंद्राणी तालुकदार ने मंगलवार को दिया।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में तालुकदार ने कहा कि ब्रिक्स समिट की कामयाबी को जो बात अच्छी तरह से दिखाती है, वह है 'दिल्ली डिक्लेरेशन',जिसमें भारत सभी सदस्यों को एक साथ लाने और एक आम सहमति बनाने में कामयाब रहा। इससे देश की वैश्विक स्तर पर अच्छी छवि बनाने में मदद मिली है, जो उसे आगे फायदा पहुंचाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक नजरिए से भी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता काफी महत्वपूर्ण रही। इसमें पश्चिम एशिया के जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया गया। साथ ही कि कोशिश की गई 'ग्लोबल नॉर्थ' मिलकर काम करें।
तालुकदार ने कहा कि ब्रिक्स में एनर्जी सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा आदि को लेकर भी बात की। इससे ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती मिलेगी।
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के सफल आयोजन पर कहा कि पूरे देश और दुनिया ने ब्रिक्स सम्मेलन 2026 की सफलता देखी। इस सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिनमें 11 सदस्य देशों, 10 साझेदार देशों, 4 क्षेत्रीय संगठनों और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत वैश्विक भूमिका रही। सम्मेलन में अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों के स्तर पर हुआ। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई बड़े नेता इसमें शामिल हुए।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत के नई दिल्ली में आयोजित हुआ। ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है, आर्थिक उत्पादन दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत है और व्यापार की कुल मात्रा दुनिया के कुल व्यापार का पांचवां हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि वर्ष 2028 तक "ग्रेटर ब्रिक्स" की आर्थिक विकास दर जी7 की तुलना में तीन गुना हो जाएगी।
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