भानगढ़ के भूतिया किले में एक रात बिताने वाले गौरव तिवारी की मौत बनी रहस्य, जानिए पूरी कहानी
राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित भानगढ़ किला इतिहास, वास्तुकला और रहस्यमयी कहानियों का अनोखा संगम है। कभी रौनक से भरा यह इलाका आज खंडहरों में तब्दील हो चुका है। सुनसान महल, पुराने मंदिर, वीरान बाजार और ऊंची किलेबंदी भानगढ़ के पुराने वैभव की कहानी कहते हैं। यही वीरानी और इससे जुड़ी लोककथाएं इसे देश के सबसे चर्चित कथित 'भूतिया' स्थानों में शामिल करती हैं।
कभी 9 हजार से ज्यादा घरों की थी बस्ती
भानगढ़ को केवल एक किले के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह कभी एक पूरी आबाद नगरी थी। राजस्थान पर्यटन के मुताबिक यहां 9 हजार से ज्यादा मकान होने का उल्लेख मिलता है। किले के भीतर महल, हवेलियां, मंदिर और बाजार मौजूद थे। तीन स्तर की किलेबंदी और पांच विशाल द्वार इस नगर की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थे।
किले में आज भी गोपीनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, केशव राय मंदिर, मंगला देवी मंदिर और गणेश मंदिर के अवशेष देखे जा सकते हैं। राजमहल के बारे में कहा जाता है कि वह कभी सात मंजिला था, हालांकि अब इसकी केवल कुछ मंजिलें ही बची हैं।
बाबा बालू नाथ के श्राप की कहानी
भानगढ़ से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानियों में एक बाबा बालू नाथ की है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, किला और नगर बसाने से पहले साधु से अनुमति ली गई थी। शर्त थी कि यहां बनने वाली किसी भी इमारत की छाया उनके निवास पर नहीं पड़नी चाहिए।
कहानी के मुताबिक बाद में किले की ऊंचाई बढ़ाई गई और उसकी छाया साधु के स्थान तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने नगर के विनाश का श्राप दे दिया। हालांकि, यह कथा लोकमान्यता है, इसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला है।
राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक की कहानी
भानगढ़ की दूसरी चर्चित कहानी राजकुमारी रत्नावती और एक तांत्रिक से जुड़ी है। लोककथा के अनुसार, तांत्रिक राजकुमारी पर मोहित था और उसने कथित तौर पर जादू के जरिए उन्हें अपने वश में करने की कोशिश की।
राजकुमारी को जब इसकी जानकारी हुई तो कथित रूप से उसने तांत्रिक की चाल नाकाम कर दी। कहानी में बताया जाता है कि मृत्यु से पहले तांत्रिक ने भानगढ़ को श्राप दिया। बाद में नगर उजड़ गया और लोगों ने इस घटना को किले के रहस्य से जोड़ दिया। यह कहानी भी लोककथा के रूप में प्रचलित है, प्रमाणित इतिहास नहीं।
सूर्यास्त के बाद प्रवेश क्यों नहीं?
भानगढ़ की रहस्यमयी पहचान का सबसे बड़ा कारण यहां सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर प्रतिबंध है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार किले में सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद प्रवेश की अनुमति नहीं है। यही नियम इस स्थान से जुड़ी डरावनी कहानियों को और हवा देता है।
हालांकि, इस प्रतिबंध को भूत-प्रेत की मौजूदगी का प्रमाण मानना सही नहीं होगा। किला खंडहरों में है और कई संरचनाएं पुरानी तथा असुरक्षित हैं। रात में अंधेरा और दुर्गम इलाका पर्यटकों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
क्या सच में भानगढ़ भूतिया है?
भानगढ़ को 'भारत की सबसे भूतिया जगह' कहे जाने के पीछे मुख्य आधार लोककथाएं, लोगों की धारणाएं और इसकी वीरान संरचनाएं हैं। किसी अलौकिक घटना का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। राजस्थान पर्यटन भी इसे रहस्यमयी और कथित रूप से प्रेतबाधित स्थान के तौर पर प्रस्तुत करता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कहानियों को किंवदंतियों के रूप में ही बताया जाता है।
इसलिए भानगढ़ की असली खूबसूरती शायद उसके कथित भूतों में नहीं, बल्कि उसके सदियों पुराने इतिहास, मंदिरों, राजमहल और अरावली की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में छिपी है। इतिहास और रहस्य का यही मेल हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को यहां खींचता है।

