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गांधीनगर: एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव ने एआई-आधारित वीआर कोर्टरूम सिमुलेशन कार्यक्रम किया शुरू

गांधीनगर, 28 फरवरी (आईएएनएस)। एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव ने एक अनोखा एआई-आधारित वर्चुअल रियलिटी कोर्टरूम सिमुलेशन कार्यक्रम शुरू किया है। यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है, जो कानूनी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
गांधीनगर: एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव ने एआई-आधारित वीआर कोर्टरूम सिमुलेशन कार्यक्रम किया शुरू

गांधीनगर, 28 फरवरी (आईएएनएस)। एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव ने एक अनोखा एआई-आधारित वर्चुअल रियलिटी कोर्टरूम सिमुलेशन कार्यक्रम शुरू किया है। यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है, जो कानूनी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह में किया। यह कार्यक्रम एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल के तहत शुरू किया गया है और इसे मर्स्क ट्रेनिंग द्वारा गुजरात मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के लिए विकसित किया गया है।

यह एआई-सक्षम वीआर कोर्टरूम छात्रों को एक पूरी तरह इंटरैक्टिव वर्चुअल अदालत में ले जाता है, जहां वे वकालत, साक्ष्य प्रस्तुत करना, जज से संवाद और कानूनी रणनीति जैसे कौशल का अभ्यास कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सैद्धांतिक पढ़ाई को अनुभव-आधारित सीख में बदलना है।

यह प्लेटफॉर्म विभिन्न कानूनी क्षेत्रों में उपयोगी है, खासकर समुद्री कानून, मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे जटिल मामलों के लिए। इससे छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों जैसा अनुभव मिलेगा और वे व्यावहारिक कौशल विकसित कर सकेंगे।

दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत उपस्थित रहे। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति निलय विपिनचंद्र अंजारिया भी मौजूद थे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव की यह एक प्रभावशाली पहल है। यह वकीलों के व्यावहारिक प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इसका भविष्य उज्ज्वल है।”

एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव के प्रबंध निदेशक गिरीश अग्रवाल ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और इसमें डिजिटल व एआई तकनीक का उपयोग जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी केवल बुनियादी ढांचे में ही नहीं, बल्कि शिक्षा, नवाचार और संस्थागत क्षमता निर्माण में भी निवेश कर रही है।

सीएसआर प्रमुख कर्नल अंकुर वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास कंपनी की सीएसआर नीति का प्रमुख हिस्सा है। इस पहल के माध्यम से छात्रों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

जीएनएलयू के निदेशक प्रो. एस. शांथाकुमार ने कहा कि एआई और वीआर तकनीक का कानूनी शिक्षा में समावेश छात्रों को वैश्विक कानूनी माहौल के अनुरूप तैयार करेगा, खासकर समुद्री कानून और विवाद समाधान के क्षेत्र में।

यह पहल गुजरात के समुद्री और कानूनी शिक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और उद्योग व शिक्षा के बीच बेहतर सहयोग को दर्शाती है।

एपीएम टर्मिनल्स पिपावाव भारत के प्रमुख बंदरगाहों में से एक है, जहां कंटेनर, ड्राई बल्क, लिक्विड बल्क और रो-रो कार्गो की सुविधा उपलब्ध है। यह देश का पहला सार्वजनिक-निजी भागीदारी बंदरगाह है और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ा पहला पोर्ट भी है।

एपीएम टर्मिनल्स दुनिया भर में आधुनिक कंटेनर टर्मिनल विकसित और संचालित करता है। यह ए.पी. मोलर-मर्स्क समूह का हिस्सा है और 33 देशों में 60 से अधिक स्थानों पर अपनी सेवाएं देता है। कंपनी में लगभग 22,000 कर्मचारी कार्यरत हैं और 2024 में इसके टर्मिनलों पर 27,000 से अधिक जहाज आए तथा 23.2 मिलियन कंटेनर मूवमेंट दर्ज किए गए।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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