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ब्लू व्हेल से लेकर कोरियन लवर गेम तक: खतरनाक ऑनलाइन गेम्स और उनके प्रभाव

ब्लू व्हेल से लेकर कोरियन लवर गेम तक: खतरनाक ऑनलाइन गेम्स और उनके प्रभाव

साल 2017 से 2019 के बीच जब 'ब्लू व्हेल गेम चैलेंज' सामने आया था, तो यह दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया था। यह गेम खासतौर पर नाबालिगों को टारगेट करके बनाया गया था, जिसमें खिलाड़ियों को 50 दिनों में 50 खतरनाक कार्य पूरे करने होते थे। दावा किया गया कि यह गेम ‘सुसाइड गेम’ था, क्योंकि इसके कई खेल खिलाड़ियों की मौतों से जुड़कर सामने आए।

हाल ही में एक नए ऑनलाइन गेम ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। इसे 'कोरियन लवर गेम' कहा जाता है। यह गेम तब सुर्खियों में आया जब गाजियाबाद की तीन नाबालिग बहनों ने ऑनलाइन कोरियन गेम के चक्कर में नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी मचा दी और माता-पिता तथा शिक्षकों में डर और जागरूकता बढ़ा दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऑनलाइन गेम बच्चों और किशोरों पर मानसिक और भावनात्मक रूप से गहरा असर डालते हैं। ये गेम्स अक्सर नाबालिगों की संवेदनशील मानसिक स्थिति का फायदा उठाते हैं और उन्हें खतरनाक कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं। ब्लू व्हेल और कोरियन लवर गेम जैसे मामले समाज में गंभीर चेतावनी का संकेत हैं कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

ब्लू व्हेल गेम और इसी तरह के खतरनाक गेम्स पर कई देशों ने कड़ी कार्रवाई की है। रूस, भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों ने ऐसे गेम्स पर बैन लगाया है या उनके वितरण को रोकने के लिए नियम बनाए हैं। रूस ने विशेष रूप से ब्लू व्हेल गेम के खिलाफ कानून बनाया और इसके प्रचार को रोकने के लिए इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी। भारत में भी कई बार सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को ऐसे खतरनाक गेम्स को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखें और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के बारे में शिक्षित करें। बच्चों को समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर हर गेम सुरक्षित नहीं होता और कुछ गेम मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इसके अलावा, स्कूल और समाज में साइबर जागरूकता अभियान भी चलाना जरूरी है ताकि बच्चों और किशोरों को सुरक्षित ऑनलाइन गेमिंग की जानकारी दी जा सके।

खतरनाक ऑनलाइन गेम्स की बढ़ती प्रवृत्ति ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और जागरूकता आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। चाहे वह ब्लू व्हेल हो या कोरियन लवर गेम, इनसे जुड़े खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। माता-पिता, शिक्षक और समाज के सभी लोग मिलकर बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण देने के लिए कदम उठाएं।

इस घटना ने यह भी दर्शाया कि डिजिटल मनोरंजन में संतुलन बनाए रखना और बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना जरूरी है। केवल मनोरंजन के लिए शुरू किए गए गेम्स कभी-कभी जीवन के लिए गंभीर खतरे में बदल सकते हैं। इसलिए हर माता-पिता और शिक्षक को चाहिए कि वे बच्चों को इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग के खतरों से अवगत कराएँ और समय-समय पर उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखें।

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