फुटबॉल मैदान में उतरे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, युवाओं के साथ संवाद भी किया
हल्द्वानी, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नैनीताल जिले के हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने के बाद स्थानीय युवाओं के बीच पहुंचकर फुटबॉल खेला। नैनीताल रोड स्थित मिनी ग्राउंड में नितिन नवीन खिलाड़ियों के साथ इस खेल का लुत्फ उठाते नजर आए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अनिल बलूनी और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत भी उनके साथ मौजूद रहे। फुटबॉल खेलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने युवाओं के साथ संवाद भी किया।
नितिन नवीन ने इसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा, "हमने 'हैट-ट्रिक' लगाई। हल्द्वानी में अपने युवा दोस्तों के साथ भरपूर खुशी, सच्ची टीम भावना और एक यादगार फुटबॉल मैच।"
राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के बावजूद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का युवाओं के साथ मैदान में उतरकर फुटबॉल खेलना चर्चा का विषय बन गया। फुटबॉल मैच के बाद नितिन नवीन ने स्थानीय युवाओं से संवाद किया, उनके अनुभव सुने और उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।
गुरुवार को उत्तराखंड के हल्द्वानी में पूर्व सैनिकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई कई पहलों और सशस्त्र बलों व राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके असर के बारे में बताया।
नितिन नवीन ने हल्द्वानी में भाजपा की दो दिवसीय विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शिरकत की। उत्तराखंड दौरे पर हल्द्वानी में पूर्व सैनिकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर भी ज्यादा जोर दिया है। बॉर्डर पर बसे गांवों को देखने का नजरिया बदला है। अब उन्हें भारत के 'आखिरी गांवों' के बजाय 'पहले गांवों' के तौर पर देखा जाता है। बॉर्डर के इलाकों में बेहतर सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का मकसद कनेक्टिविटी को मजबूत करना, दूर-दराज के इलाकों में विकास को बढ़ावा देना और सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करना है।
भाषण में खास तौर पर बॉर्डर इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी का जिक्र किया गया, जो 2014 के बाद बदले हुए नजरिए का एक उदाहरण है।
नवीन के मुताबिक, मोदी सरकार ने सैन्य बलिदान की राष्ट्रीय स्तर पर याद को मजबूत करने की भी कोशिश की है। नई दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल में उन 25,942 सैनिकों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। देहरादून में प्रस्तावित 'सैनिक धाम' और 1,845 शहीदों की याद में उनके गांवों में मूर्तियां लगाने का फैसला, सैन्य कर्मियों के सम्मान पर दिए जा रहे जोर को और भी रेखांकित करता है।
--आईएएनएस
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