फ्लेक्सी कैप फंड्स का एयूएम बीते चार वर्षों में 148 प्रतिशत बढ़ा
मुंबई, 20 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के फ्लेक्सी कैप फंड्स का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बीते चार वर्षों में 148.28 प्रतिशत बढ़ा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि बीते पांच वर्षों में शीर्ष फ्लेक्सी कैप फंड्स ने 20 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है।
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया कि दिसंबर 2025 में फ्लेक्सी कैप फंड्स का एयूएम बढ़कर 5.52 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि दिसंबर 2021 में 2.22 लाख करोड़ रुपए था।
इन फंडों में प्रति माह शुद्ध निवेश पिछले चार वर्षों में लगभग 316 प्रतिशत बढ़कर दिसंबर 2025 में 10,019 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि 2021 में यह 2,409 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत से निवेश में 78.44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मार्च 2025 में 5,615 करोड़ रुपए था।
रिपोर्ट में बताया गया कि निवेशकों के फ्लेक्सी कैप फंड्स की ओर आकर्षित होने की वजह लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश के लिए निश्चित आवंटन सीमा न होना है।
इसके कारण फंड मैनेजर बाजार की परिस्थिति के अनुसार बिना किसी सीमा के पूरी स्वतंत्रता के साथ किसी भी कैटेगरी के स्टॉक में निवेश कर सकते हैं।
आईसीआरए एनालिटिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बाजार डेटा प्रमुख अश्विनी कुमार ने कहा, "फ्लेक्सी कैप फंडों के फंड मैनेजरों के पास बदलते बाजार की स्थितियों के अनुकूल होने और एक गतिशील दृष्टिकोण अपनाने की लचीलता होती है, जो बेहतर विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करता है, जिसमें लार्ज कैप की स्थिरता को मिड और स्मॉल कैप की विकास क्षमता के साथ जोड़ा जाता है।"
कुमार ने आगे कहा कि निवेशक इन फंडों की ओर आकर्षित होते हैं क्योंकि ये बाजार में मंदी के दौरान मजबूती से टिके रहते हैं और आमतौर पर मिड-कैप या स्मॉल-कैप फंडों की तुलना में बेहतर डाउनसाइड प्रोटेक्शन प्रदान करते हैं।
बाजार में वर्तमान में उपलब्ध लगभग 24 फ्लेक्सी कैप फंडों का औसतन पांच साल का वार्षिक रिटर्न लगभग 16.08 प्रतिशत है, जिनमें से शीर्ष प्रदर्शन करने वाले फंडों ने पांच साल में 20 प्रतिशत से अधिक का वार्षिक रिटर्न अर्जित किया है।
फ्लेक्सी कैप फोलियो की संख्या दिसंबर 2021 में 1.10 करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 में दोगुनी होकर 2.21 करोड़ हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को उम्मीद है कि खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, मजबूत एसआईपी निवेश और भारत के संरचनात्मक इक्विटी बाजार के विस्तार के कारण यह श्रेणी दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखेगी।
--आईएएनएस
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