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फिटजी केस में ईडी की चार्जशीट दाखिल, 71.88 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग

फिटजी केस में ईडी की चार्जशीट दाखिल, 71.88 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग
फिटजी केस में ईडी की चार्जशीट दाखिल, 71.88 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग

लखनऊ, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने फिटजी लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स दिनेश कुमार गोयल व मोनिला गोयल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की है।

ईडी ने शुक्रवार को गाजियाबाद की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की है और जांच के दौरान जब्त और अस्थायी रूप से कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने और दोषसिद्धि की मांग की है।

ईडी की जांच यूपी पुलिस द्वारा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में और मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा भोपाल में दर्ज चार एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

एफआईआर में आरोप है कि फिटजी ने जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दो से चार साल के कोचिंग प्रोग्राम के लिए प्रति छात्र 2.8 लाख से 3.5 लाख रुपए तक की फीस एडवांस में ली थी, यह भरोसा देकर कि पूरा कोर्स कराया जाएगा।

लेकिन वेतन न मिलने के कारण फैकल्टी चली गई और बिना किसी पूर्व सूचना के सेंटर अचानक बंद कर दिए गए। आरोप यह भी है कि मैनेजमेंट ने फीस का डायवर्जन किया और फैकल्टी के जाने के बाद भी झूठे आश्वासन देकर नए छात्रों से फीस वसूलना जारी रखा।

नोएडा पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट करीब 300 पीड़ितों, फिटजी कोचिंग सेंटर के ऑपरेटरों और अन्य गवाहों के बयानों के साथ-साथ फीस रसीदों और जांच में मिले अन्य सबूतों पर आधारित है।

जांच में पता चला है कि फिटजी ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 सेंटर बंद कर दिए, जिससे 14,411 छात्र बिना कोचिंग के रह गए, जबकि उन्होंने पूरी फीस दी थी। कंपनी ने मार्च 2029 तक चलने वाले प्रोग्राम के लिए भी छात्रों का एडमिशन जारी रखा, जबकि उसे पता था कि वह उन्हें पूरा नहीं कर पाएगी। वसूली गई फीस तब खर्च की गई, जब कंपनी लगातार घाटे में थी। फीस का वह हिस्सा, जिसे रोककर गबन किया गया, उसे 85.79 करोड़ रुपए के अपराध से प्राप्त धन के रूप में निर्धारित किया गया है।

आगे की जांच में पता चला है कि कंपनी को नियंत्रित करने वाले दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल ने वित्त वर्ष 2022-23 से 24.92 करोड़ रुपए वेतन के रूप में लिए। मोनिला गोयल परिवार के पास 86.31 प्रतिशत शेयर हैं, इसलिए यह स्पष्ट है कि डायरेक्टर्स ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के अपना वेतन खुद मंजूर किया। उन्होंने खुद को पहले भुगतान किया, जबकि अन्य कर्मचारियों का वेतन देरी से दिया गया या नहीं दिया गया। दिनेश गोयल ने करीब 56 लाख रुपए प्रति माह और मोनिला गोयल ने 25 लाख रुपए प्रति माह से अधिक वेतन लिया, जबकि मोनिला ने खुद माना कि वह नियमित रूप से ऑफिस नहीं जाती थीं और सिर्फ घर से चेक पर हस्ताक्षर करती थीं। सेंटर बंद होने के दौरान भी उन्हें भुगतान जारी रहा।

ईडी ने इससे पहले 24 अप्रैल 2025 को 7 ठिकानों पर छापेमारी कर 10 लाख रुपए नकद और 4.86 करोड़ रुपए के गहने जब्त किए थे और 9 अक्टूबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत 66.92 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी। मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

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