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फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के बाद हुई थी झड़प, लिएंड्रो परेडेस पर लगा 10 मुकाबलों का बैन

फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के बाद हुई थी झड़प, लिएंड्रो परेडेस पर लगा 10 मुकाबलों का बैन
फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के बाद हुई थी झड़प, लिएंड्रो परेडेस पर लगा 10 मुकाबलों का बैन

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। फीफा ने अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस पर वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में हार के बाद स्पेन के साथ हुई झड़प में शामिल होने के कारण 10 मैचों का बैन लगाया है। इस सजा के कारण वह अगले एक साल तक नेशनल टीम से बाहर रहेंगे।

अर्जेंटीना की हार के बाद स्पेन के डिफेंडर एरिक गार्सिया का गला पकड़ने और गावी को जमीन पर गिराने के लिए परेडेस पर 10 मैचों का बैन लगाया गया। यह सजा वर्ल्ड कप के इतिहास की सबसे कड़ी सजा में से एक है और यह 2013 में क्रोएशिया के जोसिप सिमुनिक को दिए गए सस्पेंशन के बराबर है। अर्जेंटीना के डिफेंडर नहुएल मोलिना पर 7 मैचों का बैन लगाया गया और मिडफील्डर थियागो अल्माडा पर एक मैच का बैन लगाया गया है।

परेडेस और मोलिना पर 90 हजार डॉलर और अल्माडा पर 30 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया गया। फीफा के इंटरनेशनल कैलेंडर के अनुसार जून 2027 तक अर्जेंटीना के लिए 10 मैच तय हैं, इसलिए परेडेस का बैन असल में नेशनल टीम से एक साल के बैन के बराबर है। ये सभी 10 मुकाबले फ्रेंडली मैच हो सकते हैं, क्योंकि उस दौरान अर्जेंटीना का कोई प्रतिस्पर्धी मैच तय नहीं है। स्पेन के मिडफील्डर गावी पर भी एक मैच का बैन लगाया गया है, जिसे उन्हें 26 सितंबर को वेम्बली में नेशंस लीग में इंग्लैंड के खिलाफ स्पेन के मैच में भुगतना होगा।

अर्जेंटीना के असिस्टेंट कोच रॉबर्टो अयाला पर तीन मैचों का बैन लगाया गया और उन पर 30,000 डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (एएफए) पर भी टूर्नामेंट के दौरान हुई कई घटनाओं के लिए 1.10 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया गया, जैसे कि इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल जीत के बाद खिलाड़ियों का फॉकलैंड आइलैंड्स से जुड़ा पॉलिटिकल बैनर ले जाना और समर्थकों द्वारा भेदभावपूर्ण नारे लगाना।

अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप के लिए फीफा से 33 मिलियन डॉलर की प्राइज मनी हासिल की थी। उस समय, यूनाइटेड किंगडम के राजनेताओं ने फॉकलैंड आइलैंड्स के झंडे की आलोचना की थी और लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता एड डेवी ने संबंधित खिलाड़ियों को सस्पेंड करने की मांग की थी।

यह घटना फुटबॉल में राजनीतिक इशारों को लेकर फीफा के कड़े अनुशासनात्मक उपायों के संदर्भ में हुई थी, क्योंकि यूईएफए ने पहले स्पेनिश खिलाड़ियों रोड्री और अल्वारो मोराटा को यूरो 2024 टूर्नामेंट में जीत के बाद जिब्राल्टर पर स्पेन के दावों के बारे में गाने के लिए बैन कर दिया था।

इसके बाद एएफए ने 6 अगस्त को घोषणा में कहा कि 15 जुलाई, जिस दिन अर्जेंटीना ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में जीत हासिल की थी, उसे भविष्य में 'राष्ट्रीय फुटबॉल टीम दिवस' ​​के रूप में मनाया जाना चाहिए। अर्जेंटीना के पास प्रतिबंधों और जुर्माने के खिलाफ अपील करने का विकल्प है, क्योंकि फेडरेशन ने कहा है कि वह इन फैसलों को चुनौती देने की योजना बना रहा है।

फेडरेशन ने एक बयान में कहा, "एएफए का कानूनी विभाग समय रहते फीफा से उन फैसलों का आधार मांगेगा जिनकी समीक्षा की जा सकती है, ताकि गवर्निंग बॉडी की अपील समिति के समक्ष अपील दायर की जा सके, साथ ही भविष्य में अंतिम उपाय के तौर पर सीएएस में अपील करने का विकल्प भी खुला रखा जाएगा।"

फेडरेशन ने कहा कि उसका कानूनी विभाग तुरंत फीफा से उन फैसलों के कारण पूछेगा जिनकी समीक्षा की जा सकती है, ताकि गवर्निंग बॉडी की अपील समिति के समक्ष अपील दायर की जा सके और साथ ही मामले को अंतिम उपाय के तौर पर सीएएस में ले जाने की संभावना भी बनी रहे।

परेडेस का 10 मैचों का निलंबन हाल के विश्व कप इतिहास की कुछ सबसे कठोर सजा जैसा है। 2014 में उरुग्वे के फॉरवर्ड लुइस सुआरेज को चार महीने के लिए सभी तरह के फुटबॉल मुकाबलों से बैन कर दिया गया था। 2013 में सिमुनिक को विश्व कप क्वालीफाइंग प्लेऑफ के बाद समर्थकों से एक ऐसा नारा लगवाने के लिए मेगाफोन का इस्तेमाल करने पर 10 मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया गया था, जिसका संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्रोएशिया के नाजी-समर्थक शासन से था।

फीफा की अनुशासन समिति ने अर्जेंटीना को अपना अगला घरेलू मैच 50 प्रतिशत क्षमता वाले स्टेडियम में खेलने का आदेश दिया है, और दूसरे स्टेडियम से जुड़ी पेनल्टी के साथ-साथ 1,00,000 डॉलर का जुर्माना प्रोबेशन पर रखा गया।

--आईएएनएस

एसएम/आरएसजी

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